Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

अलविदा रज्ज़ाक खान : जिस्म की मौत कोई मौत नहीं होती है

 Sabahat Vijeta |  2016-06-01 12:33:37.0

razzakशबाहत हुसैन विजेता


लखनऊ. फैयाज़ टक्कर याद हैं ना. याद हैं तो बस याद रखिये क्योंकि अब वह यादों में ही रहेंगे. कभी रूबरू नहीं होंगे. आपनी शानदार कामेडी से हर किसी के दिल में उतर जाने वाले फैयाज़ टक्कर यानी रज्ज़ाक खान के दिल ने आज धोखा दे दिया. कल रात साढ़े 12 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा तो फ़ौरन बांद्रा के होली फैमली हॉस्पिटल ले जाया गया जहाँ उन्होंने आख़री सांस ली.


रज्ज़ाक खान की खूबी यह थी कि सामने आ खड़े होते थे तो बहुत गम्भीर लगते थे. बात बड़ी संजीदगी से करते थे. हंसने के लिए उनसे रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी कि वह अपनी किसी फिल्म का डायलाग सुनाएँ. डायलाग भी वह इस खूबी से सुनाते थे कि सुनने वाले ठहाके लगाने लगते थे और वह पहले की तरह गम्भीर मुद्रा में खड़े रहते थे. उनके असली नाम रज्ज़ाक खान के नाम से कम लोग उन्हें पहचानते थे. ज्यादातर तो उनके किरदार वाले नाम से उन्हें पहचानते थे. इधर कुछ सालों से वह फैयाज़ टक्कर थे. उससे पहले मानिकचंद के नाम से पहचाने जाते थे. मानिकचंद वह शाहरुख़ खान की फिल्म बादशाह में बने थे. बालीवुड में उनकी पहचान गोल्डन भाई के नाम से भी थी. वह बाबू बिसलरी, मुन्ना मोबाइल और लक्की चिकना के नाम से भी पहचाने गए.अभी हाल में कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में रज्ज़ाक नज़र आये थे.


फ़िल्मी दुनिया में रज्ज़ाक खान थोड़ा देर में आये लेकिन जब आये तो कभी उनके पास काम की कमी नहीं रही. हर साल उनकी कई फ़िल्में आती रहती थीं. उन्होंने 50 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. शाहरुख़ खान, सलमान खान और गोविंदा जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने के बावजूद रज्ज़ाक खान की यह खूबी थी कि अपने काम की अहमियत वह कभी कम नहीं होने देते थे. फिल्म देखकर निकले लोग उनके किरदार को कभी इग्नोर नहीं कर पाते थे.


razzak_khan_1464767450फिल्म बादशाह, हैलो ब्रदर, अंखियों से गोली मारे, रूप की रानी चोरों का राजा, मोहरा, दिल तेरा आशिक़, राजा हिन्दुस्तानी, लोहा, प्यार किया तो डरना क्या, चाइना गेट, गुंडा, हसीना मान जायेगी, कारतूस, हर दिल जो प्यार करेगा, हेराफेरी, फिर हेराफेरी, क्या कूल हैं हम, क्या कूल हैं हम-3

और अता पता लापता जैसी शानदार फिल्मों के ज़रिये रज्ज़ाक खान ने लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई.


कुछ साल पहले लखनऊ के होटल क्लार्क्स अवध में उनसे मुलाक़ात हुई थी. वह यहाँ एक अखबार के लोकार्पण समारोह में आये थे. दरअसल उस अखबार की लांचिंग के साथ-साथ युवा निर्देशक शुजा अली की लखनऊ में शूट हुई दो फिल्मों का प्रमोशन भी होना था. शुजा अली ने मुलाक़ात कराई तो रज्ज़ाक खान भी बहुत मोहब्बत से मिले. उनकी बातचीत के अंदाज़ से ज़रा भी महसूस नहीं हुआ कि यह वही शख्स है जिसके दीवानों की तादाद बहुत ज्यादा है. रज्ज़ाक खान के न रहने की खबर आज एक्टर शहजाद खान से मिली. उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिये यह मनहूस खबर सुनाई कि रज्ज़ाक खान अब कभी नहीं हंसाएंगे. हंसाने वाले होंठ अब चुप हो गए हैं. उनके बेटे असद खान क्रोएशिया में हैं. उनका इंतज़ार किया जा रहा है. कल रज्ज़ाक खान को मुम्बई में ही सिपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया जाएगा. यह सही है कि वह अब नहीं हैं लेकिन यह भी हकीकत है कि जिस दौर में हंसी की ज़रुरत आक्सीजन की तरह हो गई है उसमें उनके न रहने पर भी उनकी फ़िल्में चेहरों पर मुस्कान बिखेरेंगी. ऐसे में किसी शायर की यह सोच फिर से सच लगेगी कि

होंठ थम जाने से पैगाम नहीं थम जाते, जिस्म की मौत कोई मौत नहीं होती है.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top