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भारत सरकार ने मांनी नागालैंड अलग झंडा और अलग पासपोर्ट की मांग ?

 Tahlka News |  2016-06-22 07:03:51.0

naga land
तहलका न्यूज़ डेस्क

कोहिमा. साल 2015 में जिस नगा समझौते को मोदी सरकार ने देख के लिए खुशखबरी बताया था , अब कुछ समाचारों ने उसके प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. समाचारों के अनुसार नागालैंड में शांति समझौते के लिए भारत सरकार और विद्रोही ग्रुप NSCN-IM के बीच समझौते के अनुसार नागालैंड के लोग अपना अलग झंडा और पासपोर्ट रख सकेंगे.

आश्चर्यजनक रूप से इस बात का खुलासा समझौता होने के लगभग 1 साल बाद हुआ है और भारत सरकार ने भी इस पर चुप्पी साधी है . भारत की मुख्यधारा की मीडिया ने भी इस पर कोई समाचार नहीं प्रकाशित किया है जबकि उत्तर पूर्व के स्थानीय समाचार पत्रों ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है .


NSCN-IM के स्वघोषित गृह मंत्री किलो किनोंसेर के अनुसार भारत सरकार ने उनकी अलग झंड और पासपोर्ट की मांग मान ली है और यह 2015 के समझौते का हिस्सा है.

पूर्व विद्रोही समूह के अनुसार NSCN-IM और भारत सरकार के बीच का यह समझौता नागाओं के अलग राजनितिक विचारधारा की जीत है.
नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार द्वारा इस समझौते को ऐतिहासिक बताया गया था और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि देश को खुशखबरी मिलने वाली है.

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नागालैंड के एनएससीएन यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड के साथ शांति समझौते पर 3 अगस्त 2015 को हस्ताक्षर किए थे. प्रधानमंत्री के आवास पर रक्षामंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की मौजूदगी में इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

समझौते में शामिल विद्रोही समूह का दावा है कि  इस समझौते के सिद्धांतो के अनुसार नगा अब दोहरी पहचान के साथ अपना अलग झंडा और पासपोर्ट रख सकेंगे.

NSCN-IM के स्वघोषित गृह मंत्री किलो किनोंसेर का कहना है कि एतिहासिक रूप से नगा कभी भी भारत का हिस्सा नहीं रहे और न ही कभी भारत में विलय के किसी समझौते पर उन्होंने दस्तखत किए. उन्होंने लोगो से अपील की है कि वे एक मजबूत नगा देश के लिए अपना विचार बनाना शुरू करें.

हलाकि इस विषय पर नागालैंड की प्रमुख पत्रकार मोनालिसा ने कहा है ...  “Numerous leaders of various factions keep making such announcements. For us, the local people here, this is not an earthshaking announcement.” She added that, “There has been not any endorsement or official reaction from the Government of India.” When asked whether NSCN-IM’s announcement represents a local demand and sentiments of Nagas, Monalisa said, “The general opinion amongst the local is that people have not given their mandate to any one of factions to represent them.”

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