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धन दौलत से प्रसन्न नहीं होते भगवान

 Sabahat Vijeta |  2016-12-21 14:42:24.0

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लखनऊ. मुमुक्षु सेवा मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में माधव सभागार निरालानगर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें व अन्तिम दिन बुधवार को कथा व्यास संत प्रमोद दास महाराज ने कहा कि भगवान भाव के भूखे है. भगवान धन दौलत से नही प्रसन्न होते है.


संत प्रमोद दास जी महाराज ने कहा कि भगवान वस्तु के नही भाव के भूखें है. माता शबरी के भक्तिभाव को देखकर प्रभु स्वयं माता की कुटिया पर पधार कर कन्द मूल फल बड़े ही प्रेम से खाते है. जहां भक्ति का भाव होगा भगवान वहां पहुंच ही जाते हैं.


संत ने कहा कि भक्ति और भगवान के मिलन में दो बाधायें है. प्रभु राम जब शबरी माता की ओर आ रहे थे तब दो राक्षस मिले. एक विराध दूसरा कबन्ध. जब जीव भक्ति की ओर चलता है तब विरोध मिलेगा. विरोध का विरोध कर के जीता नही जा सकता, उसे नजरन्दाज करके आगे बढ़ जाये. दूसरी बाधा कबन्ध है जिसके सिर नही केवल पेट है. अर्थात जो केवल पेट के लिए ही जीता है विवेक नही करता. ऐसे लोग भी भक्ति की ओर नही बढ़ पाते है. सन्त श्री ने भक्ति का वर्णन करते हुए ‘प्रेम जब अनन्त हो गया रोम रोम सन्त हो गया‘ भजन सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया.


कथा के बाद संत प्रमोद दास महाराज के आशीर्वाद से संयोजक मिथलेश कुमार दीक्षित व पीयूष दीक्षित ने कथा में सहयोग करने वालों को सम्मानित किया.

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