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भूमंडलीकरण तो बदलती दुनिया की ज़रुरत है

 Sabahat Vijeta |  2016-04-14 14:27:47.0


  • उपराष्ट्रपति सहित राज्यपाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर लखनऊ पीठ में आयोजित समारोह में शिरकत की

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय देश के सर्वाधिक प्राचीन उच्च न्यायालयों में से एक : उपराष्ट्रपति 

  • उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का भी अपना सुदीर्घ और विशिष्ट इतिहास

  • न्याय एवं विधि के क्षेत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की शानदार उपलब्धियों पर देश को गर्व

  • इतने बड़े प्रदेश में सबको जल्दी और सुलभ न्याय मिले, इसके लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भूमिका बढ़ जाती है: राज्यपाल

  • लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के काम करने का उद्देश्य आम जनता के हितों की रक्षा है: बेसिक शिक्षा मंत्री

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने न्याय के क्षेत्र में विधिवेत्ताओं की भूमिका की सराहना की


vp-1लखनऊ, 14 अप्रैल. भारत के उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने आज यहां गोमती नगर स्थित नये हाईकोर्ट भवन में आयोजित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 150वीं वर्षगांठ समारोह को सम्बोधित किया। अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय देश के सर्वाधिक प्राचीन उच्च न्यायालयों में से एक है। वर्तमान में, यह कार्यभार, न्यायाधीशों की संख्या इत्यादि की दृष्टि से भी सबसे बड़ा न्यायालय है। इस उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का भी अपना सुदीर्घ और विशिष्ट इतिहास रहा है। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को न्याय की शानदार विरासत बताते हुए कहा कि यह उच्च न्यायालय न केवल भारत का अपितु दुनिया का विशालतम न्याय का मन्दिर है। न्याय एवं विधि के क्षेत्र में इसकी शानदार उपलब्धियों पर देश को गर्व है।


उपराष्ट्रपति ने कहा कि बदलते परिवेश में भूमण्डलीकरण एक अपरिहार्य आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थितियों में इसे केवल आर्थिक और उद्योग नीति तक सीमित नहीं किया जा सकता है, अपितु यह सभी क्षेत्रों, जिसमें न्यायिक व्यवस्था के क्षेत्र भी शामिल हैं, तक फैल गया है। अतः जितनी जल्दी हम इसके साथ सामंजस्य स्थापित कर लेंगे, उतना ही यह हम सबके लिए बेहतर होगा और इसका लाभ जनता को मिलेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को न्याय दिलाने का दायित्व न्यायाधीशों पर है। उन्होंने उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की रिक्तियों पर चिंता भी जताई।


vp-2उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उपराष्ट्रपति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों व अधिवक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस तीसरे भव्य आयोजन में सम्मिलित होकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है। न्याय के क्षेत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गरिमामयी अतीत और वर्तमान का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इतने बड़े प्रदेश में सबको जल्दी और सुलभ न्याय मिले, इसके लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की भूमिका बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका में बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि न्याय से आम आदमी को यह लगे कि उसे शीघ्र और सुलभ न्याय उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने इसमें सभी के सहयोग की जरूरत पर बल दिया।


राज्यपाल ने भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती के अवसर पर उनका स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने संविधान में किए गए प्राविधानों के माध्यम से विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की। उन्होंने कहा कि हम सभी को संविधान का सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्तियां तेजी से की जाएं।


vp-gov-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का प्रतिनिधित्व करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने उपराष्ट्रपति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों व बार के सदस्यों तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के इस महान अनुष्ठान में सम्मिलित होकर और सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें अपार हर्ष हो रहा है।


श्री हसन ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है। यहां के विद्वान न्यायाधीशों ने समय-समय पर ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिये, जो न्याय और संविधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुए हैं। इन फैसलों ने देश की दिशा और दशा, दोनों को बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कई चुनौतियों का सामना करना होता है। ऐसे में न्यायालय ही लोकतंत्र की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सभी अंगों यानी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के काम करने का उद्देश्य एक ही है और वह है जनहित, यानी आम जनता के हितों की रक्षा।


कार्यक्रम की शुरुआत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डाॅ. डी.वाई. चन्द्रचूड़ ने उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, बेसिक शिक्षा मंत्री व अन्य न्यायाधीशों के साथ ही, बार के सदस्यों का स्वागत करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गौरवमयी अतीत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने न्याय के क्षेत्र में विधिवेत्ताओं और जंगे आजादी में यहां के अधिवक्ताओं और न्यायविदों की भूमिका की सराहना की और कहा कि इस उच्च न्यायालय से सम्बन्धित न्यायाधीशों और बार के सदस्यों से न्याय के क्षेत्र में देश का गौरव सदैव बढ़ा है।


इससे पूर्व, कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का स्वागत बुके भेंट कर किया गया। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्हें एक प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया।


कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में न्यायाधीशगण, न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पण्डा, प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल, पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद, अधिवक्तागण तथा गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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