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ग्लोबल कम्पटीशन लायक बनाएं शिक्षा का स्तर : प्रणब मुखर्जी

 Sabahat Vijeta |  2016-05-12 18:00:40.0

presidentतहलका न्यूज़ ब्यूरो


वाराणसी. भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बनारस हिन्दू यूनीवर्सिटी (बीएचयू) के शताब्दी व्याख्यान में ग्लोबल कम्पटीशन बढ़ाने पर ख़ास जोर दिया. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटीज ऐसे शोध पर काम करें जिससे वैश्विक बाजार में हमारी अलग पहचान हो. इसके लिए सरकार, प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर तीनों को मिल कर काम करना होगा.
राष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में निवेश बढ़ाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि 2030 तक हमारी आबादी दुनिया की आधी आबादी के बराबर हो जायेगी. और इससे बड़ी बात यह कि सभी 25 साल के युवाओं की आबादी होगी. ऐसे में हमें इस दिशा में काम करना है कि हम इस युवा शक्ति को वैश्विक क्षितिज पर कम्पटीशन के लायक बनायें.


cm-pranabशोध की गुणवत्ता बढ़ाने की ज़रुरत जताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शोध इस तरह से हों कि जिनके बूते हम दुनिया के नक़्शे पर अपने कौशल की मांग को बढ़ा सकें.
श्री मुखर्जी ने कहा कि अगर हम अपने विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर कम्पटीशन के लायक नहीं बना पाए तो दुनिया की चुनौतियों को वह नहीं झेल पायेंगे और तरक्की में काफी पीछे चले जायेंगे.


उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षकों, छात्रों और शोधकर्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा. उन्हें अपना स्किल निखारना होगा. ज्यादा से ज्यादा फंडामेंटल रिसर्च पर जोर देते हुए कहा कि हमें देखना होगा कि हम अपने युवाओं का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं का बौद्धिक स्तर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का तैयार करना होगा.

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे यहां 119 यूनिवर्सिटी और 37000 कॉलेज हैं. इसके बावजूद हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग में 200 बेस्ट यूनिवर्सिटीज में अपना स्थान नहीं बना पाए. इसका सीधा सा कारण यह है कि जो शोध हो रहे हैं वह वैश्विक मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं. वक्त की मांग है कि हम जो भी शोध करें उसका ग्लोबल इम्पैक्ट हो. क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट हो, शोध इनोवेटिव हों और ग्लोबल कंपटीशन के काबिल हों.


prnabराष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पूछा कि मंथन होना चाहिए कि आखिर सीबी रमन के बाद कोई नोबल पुरस्कार किसी भारतीय को क्यों नहीं मिला. उन्होंने कहा कि हमें सोचना होगा कि आखिर खुराना और सुब्रमण्यम जैसे वैज्ञानिक अब क्यों नहीं पैदा हो रहे.
राष्ट्रपति ने कहा कि इसे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में इनवेस्टमेंट न के बराबर है. जबकि अमेरिका, चीन और जापान भारत से बहुत ज्यादा पैसा शिक्षा पर खर्च करता है. उन्होंने कहा कि मैंने भी वित्त मंत्री रहते हुए इन दिक्कतों का सामना किया है लेकिन इससे उबरने का तरीका तो ढूंढना ही होगा.


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महामना मदन मोहन मालवीय के विजन को साकार करने का आह्वान करते हुए कहा कि सौ साल पहले जिस सोच के साथ उन्होंने इतना बड़ी यूनिवर्सिटी खड़ी की उसे साकार करने का मौका अब है. ऐसी यूनिवर्सिटी जो 1300 एकड़ में फैली है, जिसका साउथ कैंपस 2700 एकड़ का है, जहां 16 संकाय और 20 स्टडी सेंटर हैं, जहाँ 32 हजार विद्यार्थी हैं, वहां के विद्यार्थी सारी दुनिया में जाने चाहिय और यहाँ के शोध की मांग पूरी दुनिया में होनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश के गवर्नर राम नाइक ने विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष के मौके पर विश्वविद्यालय और महामना के इतिहास को दर्शाते 100 और 10 रुपये के सिक्के जारी किए. 100 रुपये का सिक्का मान्यूमेंटल होगा जबकि 10 रुपये का सिक्का देश भर में चलेगा. केन्द्र सरकार इसके पांच करोड़ सिक्के जारी करेगी. यह दोनों ही सिक्के राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ओर से राष्ट्रपति को भेंट किए.


राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि मैंने एलएलबी तक की पढ़ाई की पर कॉलेज से. विश्वविद्यालय की परीक्षा नहीं दी. ऐसे में बीएचयू में आने पर यहां के विद्यार्थियों को देख कर उनसे ईर्ष्या होती है. ऐसा विश्वविद्यालय जहां के छात्र और पुरातन छात्र कुलगीत को जिस तरह से गुनगुनाते हैं वह इस विश्वविद्यालय की संस्कृति और सभ्यता को दर्शाता है.


कुलपति प्रो.त्रिपाठी ने राष्ट्रपति से अगले सौ साल के विजन के लिए मार्गदर्शन मांगा. साथ ही बताया कि शताब्दी वर्ष में बीएचयू भारत अध्ययन केन्द्र गंगा नदी जल विकास शोध संस्थान, ग्रीन एनर्जी सेंटर, जलवायु परिवर्तपर शोध आदि कार्य करने जा रहा है. बीएचयू का जोर इस बात पर है कि वह प्राचीन और अर्वाचीन को मिला कर चले. इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति की यूपी के गवर्नर राम नाइक और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अगवानी की.








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