Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूँ, सिकन्दर हूँ मगर हारा हुआ हूँ

 Sabahat Vijeta |  2016-09-24 17:53:06.0

ifwj


तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ.


मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूँ, सिकन्दर हूँ मगर हारा हुआ हूँ.


संगमरमर से तराशा हुआ शफ्फाक बदन, देखने वाले इसे ताजमहल कहते हैं.


चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस जहाँ तुम चले गये.


जैसे बहुत से दिल को छू लेने वाले नगमों को मशहूर गायक मिथलेश और सुगरा खान ने अपने मनोहारी सुरों से सजाया और सुनने वालों का मन देर रात तक भरा नहीं. लोग बस यही चाहते रहे की यह शानदार रात कभी खत्म ही न हो. शहर के विश्वेश्वरीय प्रेक्षाग्रह में यह शानदार शाम सजाई थी कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ न्यूज़ पेपर एंड न्यूज़ एजेंसी इम्प्लाइज़ आर्ग्नाइज़ेशन ने. देश भर से आये मीडिया के लोगों के सामने शहर के मशहूर गायक मिथलेश की गायकी और दिल्ली की कत्थक न्रत्यान्गना दीप्ति गुप्ता के फ्यूज़न ने लोगों को मोहित कर दिया.


मिथलेश ने यहाँ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम द्वारा लिखित और कम्पोज़ ग़ज़ल मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूँ. सिकन्दर हूँ मगर हारा हुआ हूँ

से अपनी शुरुआत की. उन्होंने यहाँ चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वह कौन सा देस जहाँ तुम चले गए को शानदार अंदाज़ में सुनाया तो महफ़िल में चार चाँद लग गए.


उभरती गायिका और भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय की छात्रा सुगरा खान द्वारा प्रस्तुत हमरी अटरिया पे आ जा रे सांवरिया को लोगों ने बहुत पसंद किया. सुगरा ने फिल्म उमरावजान की ग़ज़ल दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिये बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये

को भी शानदार ढंग से पेश किया.


जैसे-जैसे रात गहराती रही गीत-संगीत की यह महफ़िल जवान होती गई. चाँद अंगड़ाईयां ले रहा है चांदनी मुस्कुराने लगी है.


होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो. बन जाओ मीत मेरे मेरी प्रीत अमर कर दो.


आज फिर जीने की तमन्ना है आज फिर मरने का इरादा है. जैसे शानदार नगमों से होते-होते यह महफ़िल दमदम मस्त कलंदर अली दा पहला नंबर तक पहुँची. मिथलेश के इस शानदार कार्यक्रम को शानदार बनाने में

राकेश आर्या (स्पेनिश गिटार), नितेश (तबला), विकास (ढोलक) और विशाल (आक्टोपैड) की संगत का भी पूरा योगदान रहा.


मिथलेश से पहले यहाँ दिल्ली की कथक डांसर दीप्ति गुप्ता के ग्रुप ने फ्यूज़न का शानदार नज़ारा पेश किया. हज़रत अमीर खुसरो के कलाम छाप तिलक सब छीनी रे मोह से नैना मिलाय के से शुरुआत करने वाली दीप्ति के ग्रुप ने सूफीज्म और कथक का शानदार फ्यूज़न पेश किया. उन्होंने यहाँ जब तक बिका न था कोई पूछता न था, तुमने मुझे खरीद के अनमोल कर दिया पर शानदार डांस पेश किया, अंत में दीप्ति ने सरगम पर डांस का शानदार नज़ारा पेश किया. कार्यक्रम में प्रदेश के संस्कृति सचिव डॉ. हरिओम भी मौजूद थे.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top