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गायत्री प्रजापति ने कहा, केंद्र की नीतियों से महंगी हो रही बालू-मौरंग

 Sabahat Vijeta |  2016-05-27 18:06:07.0

gaaytreeतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने खनन से जुड़े कई ऐसे तथ्य सामने रखे हैं जिस पर आम तौर पर लोगों का ध्यान नहीं जाता है. उन्होंने केन्द्र सरकार से ओवर लोडिंग की परिभाषा को पुनर्परिभाषित करने को कहा है. गायत्री प्रजापति ने कहा कि समय के साथ परिवहन और सड़क बनाने की तकनीक बदल गई लेकिन ओवर लोडिंग की परिभाषा आज भी जहाँ की तहां खडी है.


उत्तर प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति केन्द्र सरकार के इस्पात और खान मंत्रालय द्वारा आयोजित बैठक में खनन मंत्रालय के बारे में भारत सरकार को विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में कोयले और लाइम स्टोन का खनन किया जाता है. कोयले का खनन भारत सरकार के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड की इकाई एनसीएल करती है जबकि लाइम स्टोन के खनन का पट्टा जय प्रकाश एसोसियेट के पक्ष में है.


gaytree-2श्री प्रजापति ने बताया कि प्रदेश की नदियों से बालू और मौरंग का खनन किया जाता है. बड़ा प्रदेश होने की वजह से यहाँ पर बालू, गिट्टी और मौरंग की मांग भी अधिक है. खनन मंत्री ने देश के खान मंत्रालय को बताया कि उत्तर प्रदेश में खनन के 1200 पट्टे स्वीकृत थे लेकिन न्यायालय ने खनन से पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा का प्रमाण पत्र अनिवार्य करने की शर्त लगाते हुए सारे पट्टे निरस्त कर दिए. अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि यह प्रमाणपत्र कौन लाएगा. अदालत द्वारा पूरी प्रक्रिया को निरस्त किये जाने की वजह से वर्ष 2012 से अब तक कोई नया टेंडर नहीं हो पाया है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है. श्री प्रजापति ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की बताई तकनीक से रिक्त स्थानों का टेंडर कराया गया लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करने से ही इनकार कर दिया. उन्होंने बताया कि 2012 से 2016 के बीच कोई टेंडर नहीं हो पाने से अब प्रदेश में सिर्फ 250 पट्टे ही बाकी बचे हैं.


खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने केन्द्र सरकार से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट को यह अवगत कराये कि खनन के पट्टे न होने की वजह से लोगों के सामने बालू, मौरंग और गिट्टी का मूल्य बढ़ रहा है. पारदर्शी नीति से टेंडर निकाले जाएँ तो लोगों को कम दाम पर बालू, मौरंग इत्यादी मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि सरकार को तो अवैध खनन पर चिंतित होना चाहिए न कि इस बात पर कि नियमानुसार काम में दिक्क़तें आ रही हैं.


इसके साथ ही श्री प्रजापति ने ओवर लोडिंग का मुद्दा खान मंत्रालय के सामने उठाते हुए कहा कि परिवहन के साधन बदल चुके हैं. पहले 4 पहिये के ट्रक आते थे जबकि अब 18 पहियों तक के ट्रक आ रहे हैं. गाड़ी बड़ी होगी तो माल भी ज्यादा लादेगी. लेकिन ओवर लोडिंग की बात करने वाले उसी वज़न को सही मानते हैं जो चार पहिये के ट्रक पर लादा जाता था. ऐसे में अगर ओवर लोडिंग की परिभाषा नहीं बदली गई तो लोगों को बालू, मौरंग इत्यादी को कई गुना दाम पर खरीदना पड़ेगा.

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