Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

आया राम-गया राम से बसपा के जनाधार पर कोई फर्क नहीं : मायावती

 Sabahat Vijeta |  2016-07-03 17:28:43.0

mayavati




  • केन्द्र और यूपी सरकार पर बरसीं मायावती


लखनऊ. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मलेन में केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार पर जमकर निशाना साधा.उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. ऐसे समय में केन्द्र को जो संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए वह उसे नहीं निभा रही है.


उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जनसभाओं और रैलियों की वास्तविक स्थिति पर अपनी पार्टी की प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए भी यह प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई है.


यूपी की अखिलेश सरकार को निशाना बनाते हुए मायावती ने कहा कि जब से यह सरकार बनी है तब से यहाँ क़ानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है. इस मुद्दे पर बसपा ने राज्यपाल व केन्द्र की सरकार से भी अपनी ‘‘संवैधानिक जिम्मेवारी‘‘ को निभाने की लगातार मांग की है.


उन्होंने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी तब बीजेपी के स्थानीय और राष्ट्रीय नेता भी खासकर यहाँ कि कानून-व्यवस्था को लेकर अक्सर हमारी पार्टी की ही भाषा बोलते थे. यह लोग भी प्रदेश व जनता के हित में यहाँ के राज्यपाल व केन्द्र की सरकार से अपनी संवैधानिक जिम्मेवारी को निभाने की बात किया करते थे. खास मुद्दे की आड़ में यह कहकर यहाँ कि दुःखी व पीडि़त जनता का काफी कुछ वोट ले लिया था कि केन्द्र में बीजेपी की सरकार के आते ही प्रदेश व जनहित में यहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जायेगा. लेकिन दुःख की बात यह है कि सत्ता में आते ही अब यह पार्टी भी अपने ‘‘राजनैतिक स्वार्थ‘‘ में, कांग्रेस पार्टी के ही पद-चिन्हों पर चलकर, यहाँ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को निभाने की बजाय इस मामले में ‘‘अनाप-शनाप‘‘ बातें करके इससे अपना पीछा छुड़ा रही है.


उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को यह सोचना होगा कि भाजपा अध्यक्ष यूपी में घूम-घूमकर यह कह रहे हैं कि अगर यूपी की व्यवस्था अखिलेश नहीं सुधारेंगे तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा यहाँ की व्यवस्था सुधारेंगे. मायावती ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष का यह बयान ना केवल बचकाना है बल्कि बेतुका व ग़ैर-जि़म्मेदाराना भी है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की इस मामले की चुप्पी पर पर्दा डालने व इनको संवैधानिक जि़म्मेदारी से मुक्त करने का ग़लत प्रयास है.


उन्होंने कहा कि देश के किसी भी राज्य में खासकर क़ानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने के फलस्वरूप व संवैधानिक व्यवस्थाओं के अनुसार राज्य नहीं चला पाने के कारण ही केन्द्र सरकार द्वारा उस सम्बन्धित राज्य की सरकार के खिलाफ हस्तक्षेप करने का प्रावधान संविधान में मौजूद है, जिसका भाजपा सरकार ने भी इस्तेमाल किया है. इतना ही नहीं बल्कि कुछ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश को संवैधानिक व्यवस्थाओं के अनुरूप नहीं चला पाने के कारण ही अयोध्या में हुई हिंसा (विध्वंस) के फलस्वरूप यहाँ सन् 1992 में भाजपा सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाया गया था और फिर इस प्रकार से राज्य में शान्ति व अमनचैन का वातावरण स्थापित किया गया था.


इस कारण भाजपा अध्यक्ष का यह बयान ग़लत व पूरी तरह से गुमराह करने वाला  ही है कि उत्तर प्रदेश में ध्वस्त हुई कानून-व्यवस्था के फलस्वरूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की कोई संवैधानिक जि़म्मेदारी नहीं बनती है, जबकि हमारी पार्टी संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही यहाँ उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के खिलाफ लगातार कार्रवाई की माँग कर रही है. हमारी पार्टी यहाँ की सपा सरकार के खिलाफ कुछ भी वैसा गैर कानूनी और गैर संवैधानिक काम करने की माँग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार से नहीं कर रही है जैसा कि अभी हाल ही में उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य में किया था.


उन्होंने कहा कि हालाँकि भाजपा का खासकर लोकसभा आमचुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की जनता को यह खास आश्वासन था कि केन्द्र में भाजपा की सरकार बन जाने पर वह उत्तर प्रदेश की ध्वस्त हुई कानून-व्यवस्था के मामले में ज़रूर दखल देगी. लेकिन अब केन्द्र में अपने राजनैतिक स्वार्थ के साथ-साथ यहाँ उत्तर प्रदेश में सपा से भाजपा की अन्दरुणी मिलीभगत के कारण ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है, जबकि यह पूर्णरूप से जनहित व जनकल्याण से जुड़ा हुआ मामला है.


मायावती ने कहा कि अब वास्तव में ऐसा लगता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी कमजोर स्थिति के कारण ही ना केवल सपा सरकार के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करने से गुरेज कर रही है, बल्कि यहाँ इस पार्टी ने अपने चुनावी लाभ के लिये भी सपा से मिलीभगत भी कर ली है ताकि बी.एस.पी. के बनते हुये जनाधार को, जो भी सम्भव हो, उसे नुक़सान पहुँचाया जा सके. वैसे भी उत्तर प्रदेश में भाजपा की बिगड़ी हुई स्थिति का अन्दाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अब उनकी जनसभा व रैली आदि में भीड़ या तो बाहर से अर्थात नजदीक के लगे राज्यों से यहाँ जुटाई जाती है, या फिर प्रदेश में ही यहाँ कार्यक्रम से जुड़े सम्बन्धित जिले व अन्य नजदीक के लगे सभी जिलों की भी हर विधानसभा की सीट पर 9 व 10 लोगों को टिकट देने का आश्वासन देकर, इसकी आड़ में भीड़ जुटाई जाती है. लेकिन इसके बावजूद भी भीड़ जुटाने में सफलता नहीं मिल पाने के कारण ही अब भाजपा ने अपनी ’जनसभा’ के बजाय ’बूथ प्रबन्धन कमेटी’ के नाम पर यहाँ बैठक करनी शुरू कर दी है, जिससे भाजपा के यहाँ प्रदेश में होने वाले विधानसभा आमचुनाव के सम्बन्ध में बड़े-बड़े दावों का भी काफी कुछ ‘‘खुलासा‘‘ होता है.


मायावती ने कहा कि भाजपा के बिहार चुनाव से सीखना चाहिए. हाल ही में बसपा छोड़कर गए स्वामी प्रसाद मौर्य और आर.के.चौधरी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी बसपा की सबसे ख़ास बात यह है कि आया राम-गया राम की तरह से पार्टी में आने या जाने से पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं की वजह से पार्टी के बढ़ रहे जनाधार पर रत्तीभर भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में खासकर कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों को इनके इस घिनौने हथकण्डे से अपने लोगों को जरूर सावधान रखना है. ऐसी मेरी इनकोे सलाह भी है और वैसे भी


मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की जनता ने लोकसभा आमचुनाव में इनके किये गये चुनावी वायदों के अमल में ना आने की वजह से इनसे काफी धोखा खा लिया है. ऐसी स्थिति में अब देश में जहाँ-जहाँ भी विधानसभा के आमचुनाव होंगे वहाँ वे इनके किसी भी वायदे के बहकावे में आसानी से आने वाले नहीं है और खासकर यहाँ उत्तर प्रदेश के लोग तो बीजेपी व इनकी सरकार के कतई भी बहकावे में नहीं आने वाले हैं चाहे बीजेपी व इनके सभी संगठनों के बड़े से बड़े नेता आदि लोग यहाँ ओबामा व अन्य और खास लोगों के भी उदाहरण आये दिन क्यों ना देते रहे.


उन्होंने कहा कि चाहे बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग आये दिन खासकर यहाँ उत्तर प्रदेश में आकर देश के सभी देवी-देवताओं व पौराणिक कथाओं एवं सभी छोटे-बड़े भगवानों व अयोध्या में राम-मन्दिर का भी निर्माण कराने आदि के अपने राजनैतिक स्वार्थ में गुणगान करने व उनके नाम की ही माला आदि क्यों ना जपते रहे, तब भी इनको इस बार इन सब हथकण्डों से भी यहाँ कोई खास राजनैतिक लाभ मिलने वाला नहीं लेकिन इनको यहाँ मैं सलाह के तौर पर यह भी कहना चाहती हूँ कि यदि वास्तव में इनको उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में यहाँ कि जनता का वोट चाहिये तो इनको इन सब हथकण्डों का सहारा लेने के बजाय, इन्हें लोकसभा आमचुनाव में यहाँ कि जनता को अपने किये गये खासकर गरीब व जनहित से जुड़े सभी चुनावी वायदों को यहाँ प्रदेश में विधानसभा आमचुनाव होने से पहले-पहले जमीनी तौर पर जरूर पूरा कराना होगा. लेकिन इनके अब तक के ‘‘चाल, चरित्र व चेहरे‘‘ से ऐसा नहीं लगता है कि ये लोग यहाँ आसानी से यह सब करने वाले हैं.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top