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पूर्व मुख्यमंत्रियों और पत्रकारों से नहीं खाली कराये जायेंगे सरकारी मकान

 Sabahat Vijeta |  2016-09-16 15:46:06.0

up govt


राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन संबंधित विधेयक सहित चार विधेयकों पर अपनी सहमति प्रदान की


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों से पारित चार विधेयकों पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है। राज्यपाल ने आज जिन विधेयकों पर अपनी मंजूरी दी है उनमें (1) उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) (संशोधन) विधेयक-2016, (2) उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियाँ और पेंशन) (संशोधन) विधेयक-2016, (3) राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन भवनों का आवंटन विधेयक 2016, तथा (4) उत्तर प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक-2016 राज्य विधान मण्डल के वर्षा कालीन सत्र में दोनों सदनों से पारित विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति प्राप्त होने से संबंधित विधेयक शामिल हैं. अब इन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त हो गयी है।

उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) (संशोधन) विधेयक-2016 के पारित होने से मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा राज्यमंत्री के वेतन भत्तों को पुनरीक्षित किया गया है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत उन्हें सरकारी आवास तथा अन्य सुविधाएं भी इस विधेयक द्वारा प्रदान की गयी हैं।


उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियाँ और पेंशन) (संशोधन) विधेयक-2016 के पारित होने से राज्य विधान मण्डल के सदस्यों एवं भूतपूर्व सदस्यों को अनुमन्य भत्तों, पेंशन, रेलवे कूपन और अन्य सुविधाओं को पुनरीक्षित किया गया है।


राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन भवनों के आवंटन हेतु अभी तक कोई पृथक कानून नहीं था। राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन भवनों का आवंटन विधेयक 2016 पारित होने से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों, कर्मचारी संघों, राजनैतिक दलों, पत्रकारों, अखिल भारतीय सेवा/न्यायिक सेवा के अधिकारियों, विधान परिषद के सभापति और सदस्यों, विधान सभा के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष तथा न्यायूर्तिगण को राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन भवनों के आवंटन हेतु विधि का निर्माण किया गया है।


उत्तर प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक-2016 पारित होने से अब आॅनलाइन क्रय और ई-कामर्स के माध्यम से व्यापार अथवा व्यक्तिगत प्रयोजन से स्थानीय क्षेत्र के भीतर लाये गये माल पर कर लगाया जायेगा।

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