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डासना जेल पहुंची पूर्व IAS नीरा यादव, अब आईएएस राजीव कुमार की है बारी!

 Tahlka News |  2016-03-15 05:35:41.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो
गाजियाबाद, 15 मार्च. यूपी की पूर्व आईएएस अधिकारी और नोएडा प्लॉट आवंटन घोटाले की आरोपी नीरा यादव ने सोमवार को स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। यहां से कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें डासना जेल भेज दिया। वहीं, नीरा यादव के जेल जाने के बाद पूर्व प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक राजीव कुमार के भविष्य को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।


बता दें, पहले भी नीरा यादव को 3 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वह सजा के खिलाफ हाईकोर्ट गई थीं। हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद उन्होंने स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में सरेंडर किया। 22 फरवरी को इस मामले में पूर्व आईएएस नीरा यादव और राजीव कुमार की सीबीआई की विशेष कोर्ट से मिली सजा को रद्द करने की मांग संबंधी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद शासन ने कुमार को यूपी प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक के पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया था।


बताते चले कि साल 1994-95 में नोएडा विकास प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ नीरा यादव पर प्लॉट आवंटन घोटाले के आरोप लगे थे। आरोप था कि उन्होंने अपने पद का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हुए अपनी दो बेटियों के नाम पर दो भूखंड आवंटित करा दिए थे। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने मामले से जुड़े सबूतों को कोर्ट में पेश कर नीरा यादव को दोषी बनाया था।


इसके बाद स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने नीरा यादव को 20 नवंबर 2011 को 3 साल की कैद सुनाई थी। 

 हालांकि, उन्हें फैसले के दिन ही जमानत मिल गई थी।कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ नीरा ने हाईकोर्ट में अपील की थी। 24 फरवरी 2014 को कोर्ट ने फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।


वहीं, नीरा यादव के जेल जाने के बाद पूर्व प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक राजीव कुमार के भविष्य को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। बता दें कि हाईकोंर्ट ने बीते 22 फरवरी को इस मामले में पूर्व आईएएस नीरा यादव और राजीव कुमार की सीबीआई की विशेष कोर्ट से मिली सजा को रद्द करने की मांग संबंधी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद शासन ने कुमार को यूपी प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक के पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया था।


जानकार बताते हैं कि अपील खारिज होने के बाद कुमार का कॅरियर पर संकट आ गया है। उनके सामने अब दो विकल्प बचे हैं। पहला ये कि वो भी नीरा की तरह सजा को स्वीकार कर लें या कोर्ट में सरेंडर कर दें। इसमें उनको सेवा के तीन साल जेल में गुजारने पडे़गें। दूसरा, वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करें। यदि वहां से  उन्हें राहत मिल जाती है तो बात बन सकती है। मगर, पूर्व मुख्य सचिव के सरेंडर कर देने से उनकी चुनौती बढ़ गई है। साल 1983 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार की अभी पांच साल की सेवा शेष हैं।

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