Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

Exclusive: एडीएम और एसपी की मिलीभगत से जेलों में सड़ते हैं निर्दोष

 Sabahat Vijeta |  2016-03-18 13:29:25.0

शबाहत हुसैन विजेता


iasलखनऊ, 18 मार्च. उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का आइना आज विधानभवन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में दिखा. राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निशाने पर आज सिर्फ पुलिस नज़र आई. डीजीपी की मौजूदगी में आई.ए.एस.अधिकारियों ने कहा कि अपने कागजी आंकड़ों को पूरा करने के लिए पुलिस तमाम कमज़ोर और निरीह लोगों पर गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर देती है और बेगुनाह जेलों में सड़ते रहते हैं. यह सब ए.डी.एम. और एसपी की मिलीभगत से होता है. एक अधिकारी ने तो यहाँ तक कहा कि थानों में तैनात सिपाहियों को अपनी बीट तक की पूरी जानकारी नहीं है.


एक आई.ए.एस. ने कहा कि हैलमेट न पहनने वाला तो किसी दूसरे का नुकसान करता नहीं. वह तो खुद अपने लिए खतरा मोल लेता है ऐसे में हैलमेट न होने पर चालान करने की परम्परा को खत्म किया जाना चाहिए. हैलमेट मुद्दे पर उठे इस सवाल पर नगर विकास विभाग के सचिव एसपी सिंह ने कहा कि जिस तरह आत्महत्या का प्रयास अपराध की श्रेणी में आता है उसी तरह से खुद के लिए खतरा पैदा करने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन यह कार्रवाई पुलिस और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों पर सबसे पहले होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस और ट्रैफिक विभाग से जुड़े लोग न हैलमेट लगाते हैं और न ही सीट बेल्ट लगाते हैं.


प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि हर जिले में गली-चौराहों पर अतिक्रमण के लिए अवैध रूप से धार्मिक स्थल बनाए जा रहे हैं. इंदौर के डीएम ने 350 अवैध धार्मिक स्थल तुड़वा दिए और शहर को ठीक कर दिया. यही प्रक्रिया यूपी में भी चलाई जानी चाहिए.




प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि जो इलाके सेफेस्ट प्लेस माने जाते थे वहां से गुजरने में लोग डरते हैं. एक अफसर ने तो यहाँ तक कहा कि पुलिस जहाँ निर्दोषों पर गैंगस्टर और गुंडा एक्ट लगाकर अपने कागज़ पूरे करती है वहीं माफियाओं के खिलाफ सबूत होते हुए भी उन्हें छेड़ती तक नहीं. कभी-कभी ऐसे माफिया को अपना रोल माडल बनाने का मन करता है. क्योंकि वह कुछ भी कर ले और उसका कुछ बिगड़ता ही नहीं है. उन्होंने कहा कि गैंगस्टर की लिस्ट पुलिस मनमर्जी से तैयार करती है और एसपी उस पर एडीएम से यह कहकर साइन करवा लेता है कि साहब साइन कर दो रिकार्ड मेंटेन करना है.



मंडलायुक्त वेंकटेश्वर लू ने कहा कि कानून व्यवस्था की बात क्या की जाए. कई बार तो मुख्यमंत्री का आदेश आने के बाद एफआईआर दर्ज होती है. उन्होंने कहा कि यूपी में ला एंड ऑर्डर का वर्क कल्चर डेवलप नहीं हो पा रहा है.


एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पंद्रह जिलों के थानों के रजिस्टर चेक किये हैं. इन रजिस्टरों को देखकर साफ़ तौर पर पता चलता है कि जिन मामलों की तह तक पुलिस पहुँच जाती है सिर्फ वही मामले रजिस्टर में दर्ज किये जाते हैं और बाकी को टरका दिया जाता है. ज़्यादातर सिपाही अपनी बीट की पूरी जानकारी नहीं रखते.


एक जिलाधिकारी ने कहा कि अगर कभी गलती से पुलिस पेट्रोलिंग के लिए निकल जाती है तो लोग सहम जाते हैं कि कोई बड़ी घटना हो गई है. लेकिन जब पता चलता है कि यह रूटीन पेट्रोलिंग थी. तो लोग पूछते हैं कि क्या यह पेट्रोलिंग जारी रहेगी. अगर हाँ तो हम अपने घर की महिलाओं को पार्क में टहलने के लिए अलाऊ कर दें. लड़कियां कानून व्यवस्था से इतनी त्रस्त हैं कि चौराहों पर खड़े छुटभइयों की वजह लम्बा रास्ता तय करके अपने घर जाती हैं. चौराहे से गुज़रकर उनके फिकरों का सामना कर पाना बहुत मुश्किल होता है.

  Similar Posts

Share it
Top