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किसान यूनियन ने पंचायत के माध्यम से CM अखिलेश की निम्न मांगे...

 Abhishek Tripathi |  2016-10-14 15:10:46.0

किसान यूनियन

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. भारतीय किसान यूनियन द्वारा एक किसान पंचायत का आयोजन गन्ना संस्थान डालीबाग लखनऊ में किया गया जिसमें विभिन्न जनपदों से आए हजारों किसानों ने भाग लिया बैठक में भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित तमाम जनपद के किसान मौजूद रहे।


धरना पंचायत को सम्बोधित करते हुए टिकैत साहब ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान हितों पर कुठाराघात किया जा रहा हैं। किसानों के हक के 700 करोड़ रू० को सरकार द्वारा माफ करके किसानों की कमर तोड़ने का काम किया गया हैं। भारतीय किसान यूनियन सरकार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगी इसी संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव जी ने किसानों से बातचीत का प्रस्ताव रखा जिस पर भारतीय किसान यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री आवास 5 कालीदास मार्ग पर में माननीय अखिलेश यादव जी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, से मुलाकात करते हुए निम्न मुद्दों पर वार्ता की।


गन्ने का मूल्य बढ़ाने तथा केन कमिश्नर द्वारा ब्याज माफ किये जाने के निर्णय का दोबारा रिव्यू कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति को दोबारा 18 घंटे किये जाने, पॉपुलर व यू० के० लिप्टस व्यवस्था पर मंड़ी शुल्क समाप्त किए जाने, बुंदेलखण्ड़ के मामलों पर एक समिति बनानें, धान के मुद्दे पर समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित किये जाने हेतू राइस मिल से समय से अनुबन्ध व क्रय केन्द्रों की संख्या बढ़ाये जाने, आलू के आयात पर ड्यूटी बढ़ाई जाने व निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखने एवं जैव परिवर्तित सरसों के विरोध में भारत सरकार को उत्तर प्रदेश के फैसले से अवगत कराने आदि मुद्दो पर वार्ता कर आश्वासन दिया कि किसानों की समस्याओं का निस्तारण अविलम्ब किया जायेगा। मुख्यमंत्री महोदय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जीएम सीड्स के खिलाफ और किसानों के साथ हैं। माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा उनकी महत्वकांशी योजना डीबीटी को भी जारी रखने का आश्वासन दिया गया।


मुख्यमंत्री जी द्वारा लघु सिंचाई योजना में गहरे एवं मध्यम सामान्य नलकूपों पर सब्सिड़ी बढ़ाए जाने, फसल बीमा योजना से गन्ने को बाहर किये जाने, चकबंदी प्रक्रिया में तेजी लाने, किसानों के मुकदमे वापस किये जाने तथा प्रदेश में चल रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर विभिन्न जनपदों में चल रहे आंदोलनों के संबंध में जिलाधिकारियों से वार्ता कर सभी मामले निपटाने का आश्वासन भी दिया गया।


किसान पंचायत के माध्यम से भारतीय किसान यूनियन ने राखी निम्न मांगे :- 



1. पिछले तीन वर्षो से गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं हुई हैं। किसानों के उत्पादन लागत में प्रतिकूल मौसम एवं अन्य कारणों से काफी वृद्धि हुई हैं। जिसका उदाहरण पिछले तीन वर्षों की वार्षिक महँगाई दर से भी लगाया जा सकता है। किसानों की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है, लेकिन उसके सापेक्ष किसानों को गन्ने का मूल्य नहीं मिल पाया है। प्रदेश में महँगाई दर व चीनी की रिकवरी को आधार मानते हुए पेराई सत्र 2016-17 हेतू गन्ने का परामर्शी मूल्य 450 रू. प्रति क्विंटल तय किया जाये। सरकार द्वारा घोषित गन्ने के समर्थन मूल्य का भुगतान एकमुश्त कराया जाये। समाजवादी पार्टी के घोषण पत्र में भी लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर फसलों का लाभकारी मूल्य देने का वायदा किया गया हैं।


2.   गन्ना आयुक्त द्वारा पिछले तीन गन्ना सीजन का शुगर मिलों द्वारा गन्ना किसानों को दिये जाने वाला ब्याज माफ कर दिया गया है, जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है। गन्ना आयुक्त के इस गलत निर्णय को निरस्त कर किसानों को ब्याज का भुगतान कराया जाये।  गन्ना किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाये।


3.  गन्ना क्रय केन्द्रों एवं मिल गेट के केन्द्रों पर की जा रही घटतौली पर लगाम नही लग पा रही है जिसे रोकने हेतू क्रय केन्द्रों एवं मिल गेट पर मैन्युअल कांटे की व्यवस्था करायी जाये।प्रदेश में बंद पडी सभी चीनी मिलों को चलाया जाये।


4.  किसान की तैयार धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद को सुनिश्चित किये जाने के क्रम में क्रय केन्द्रों की संख्या बढ़ाते हुए सुचारू खरीद एवं जल्द भुगतान की व्यवस्था की जायें। पिछले वर्ष की खरीद को दृष्टिगत रखते हुए राइस मिलर्स के साथ समय से अनुबन्ध किये जायें। हाईब्रिड धान की खरीदारी भी सुनिश्चित की जायें।


5.  आलू की फसल का समर्थन मूल्य घोषित कर खरीद कराई जायें। भारत सरकार द्वारा आलू पर आयात ड्यूटी मे की गई कमी का प्रदेश सरकार द्वारा पत्र लिखकर विरोध किया जाये एवं आलू के निर्यात को सुगम बनाये जाने हेतू भी भारत सरकार पर दबाव बनाया जायें।


6.  कृषि वार्निकीके अन्तर्गत किसानों द्वारा पॉपलर, सागौन, यू० के० लिप्टिस की खेती की जा रही हैं। किसानों का उत्पीड़न मण्ड़ी समिति व वन विभाग द्वारा किया जा रहा हैं। कृषि वार्निकी के अन्तर्गत आने वाले सभी वृक्षों पर सभी जनपदों में कटाई एवं ढुलाई पर लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए मण्ड़ी शुल्क भी समाप्त किया जायें। मेंथा की खेती किसानों की नकदी फसल है। मेंथा को फसल का दर्जा देते हुए मण्ड़ी शुल्क समाप्त किया जायें।


7.  प्रदेश में अचानक बिजली आपूर्ति में कमी आयी है, पूर्व के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली उपलब्ध करायी जाये। ग्रामीण क्षेत्रों में 9 घंटे दिन में तथा 9 घंटे रात्रि में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाये।


8.  प्रदेश में स्थित ब्लॉको का एक बड़ा हिस्सा डार्क जोन की श्रेणी में आने के कारण किसानों को निजी नलकूप के कनेक्शन नहीं मिल पा रहे है, जिससे किसानों का कृषि कार्य करना सम्भव नहीं हो पा रहा है। इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कर किसानों को कनेक्शन दिये जाने के उपाय अविलम्ब किये जाए।


9.  सामान्य योजना के अन्तर्गत स्वीकृत निजी नलकूप के कनेक्शन का सामान अविलम्ब उपलब्ध कराया जाए। सभी निजी नलकूपों का ऊर्जीकरण निःशुल्क कराया जाये।


10. पिछले 10 वर्षो से बुन्देलखण्ड के किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे है, जिससे किसानों पर कर्ज का बडा भार हो गया है। आये दिन बुन्देलखण्ड में किसानों द्वारा आत्महत्या की जा रही है। बुंदेलखंड के किसानों का पलायन रोकने एवम आजीविका के संकट के समाधान हेतु एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए। बुन्देलखण्ड़ के किसानों के सभी कर्ज माफ किये जायें।


11. प्रदेश में आवारा पशुओं जैसे नीलगाय, जंगली सुअर आदि के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी रोकथाम हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाये। बुन्देलखण्ड़ में अन्ना प्रथा रोकने हेतु उचित कानून बनाया जाये।


12. लघु सिंचाई योजना में निःशुल्क बोरिंग योजना, मध्यम गहरे बोरिंग व गहरे बोरिंग में अंशदान बढ़ाकर डेढ लाख रुपये प्रति बोरिंग किया जाए तथा उर्जीकरण का पैसा भी बढ़ाया जाए।


13. प्रदेश में सिंचाई हेतु नई नहरे व बांध बनाए जाएं। चौगामा नहर परियोजना एवं पंचनदा बाँध परियोजना को अविलम्ब  चालू किया जाए।


14. प्रदेश में जैव परिवर्तित (जी0एम0) फसलों के परीक्षण पर रोक लगायी जाये। हाल में ही भारत सरकार जैव परिवर्तित सरसों को अनुमति देने का प्रयास किया जा रहा हैं। जिसके विरोध में बिहार, दिल्ली, केरला सरकार द्वारो पत्र लिखकर अपना विरोध भारत सरकार के समक्ष दर्ज कराया गया हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी जैव परिवर्तित सरसों के मुद्दे पर पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया जायें।


15. प्रदेश में चल रहे भूमि अधिग्रहण के विवाद जैसे कानपुर में लखनऊ एक्सप्रेस-वे, हापुड़ जनपद के गढ़मुक्तेश्वर मण्ड़ी समिति, आजमगढ़-बलिया एक्सप्रेस-वे, मुजफ्फरनगर वाटर ट्रीटमेन्ट प्लान्ट सूजडू, मेरठ शताब्दीनगर योजना, आदि मुद्दों को वार्ता के माध्यम से जिलाधिकारी को नामित कर समाप्त कराया जायें।


16. प्रदेश में चकबन्दी कार्यो में तेजी लायी जाये तथा एक समय में एक गांव की चकबंदी समाप्त करने के बाद ही दूसरे     गांव में चकबंदी की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाये। किसी भी गांव में चकबंदी शुरू करने से पहले उसकी समय सीमा तय की जाए। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाये। मुजफ्फरनगर जनपद में जांच में भ्रष्टाचार के दोषी पाये गये चकबंदी अधिकारियों के विरूद्ध व अविलम्ब कार्यवाही की जाये।


17. आन्दोलन के दौरान किसानों पर सभी मुकदमे वापस लिये जाये। जनपद कुशीनगर एवं फैजाबाद में किसानों पर लगाये गये झूठे मुकदमे समाप्त किये जाएं।


18. फसल बीमा योजना में किसान ईकाई न होने के कारण इसका लाभ किसानों को मिलने वाला नहीं हैं। कम जोखिम वाली फसले गन्ना आदि को फसल बीमा योजना से बाहर किया जाए।


19. बाराबंकी में बंद पड़ी यू0पी0 स्पिनिंग (कताई) मिल को चालू कराया जाए।


20. उत्तर प्रदेश सरकार की पारदर्शी योजना डी.बी.टी. को समाप्त करने का षड़यन्त्र चल रहा हैं। जो किसान के लिए घाटे का सौदा साबित होगा। इस योजना को जारी रखा जायें। कृषि विभाग में विस्तार के कार्य को गति दी जायें एवं व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया जायें।




वार्ता में चौधरी राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू, दीवान चंद चौधरी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राजवीर सिंह जादौन प्रदेश अध्यक्ष, मुकेश वर्मा प्रदेश महासचिव, हरनाम सिंह लखनऊ मंडल अध्यक्ष, राजवीर सिंह मेरठ मंडल अध्यक्ष, सरदार गुरमीत सिंह जिला अध्यक्ष लखनऊ, जावेद तोमर शामली, धर्मेन्द्र मलिक मौजूद रहें।

किसान पंचायत में जनपद कुशीनगर, गोरखपुर, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, बदायूं, लखनऊ, फैजाबाद, फिरोजाबाद, उन्नाव, कानपुर, एटा, बांदा, हमीरपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर सहित सभी जनपदों के हजारों किसान शामिल हुए।

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