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भुखमरी की कगार पर खड़ा है किसान

 Sabahat Vijeta |  2016-11-23 16:51:44.0

ganna


लखनऊ. प्रदेश के गन्ना किसानों का चीनी मिलों द्वारा पिछले वर्षों का लगभग 1650 करोड़ रूपये अभी तक बकाया भुगतान न किये जाने के चलते गन्ना किसान भुखमरी की कगार पर खड़ा है। इस वर्ष गन्ने की फसल खेतों में तैयार खड़ी है किन्तु अभी तक अधिकतर चीनी मिलें शुरू नहीं हो सकी हैं। समाजवादी पार्टी ने अपने 2012 के घोषणापत्र में गन्ना किसानों को 350 रूपये प्रति कुन्तल न्यूनतम समर्थन मूल्य दिये जाने का वादा किया था किन्तु अपने शासनकाल के अंतिम चुनाव वर्ष में मात्र 25रूपये प्रतिकुन्तल बढ़ाकर समर्थन मूल्य 315 रूपये की घोषणा की गयी है जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कांग्रेस पार्टी गन्ने का समर्थन मूल्य कम से कम 350रूपये प्रति कुन्तल किये जाने की मांग करती रही है।


उ.प्र. कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आर.ए. प्रसाद पूर्व आईएएस ने आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से जारी बयान में कहा कि रवी की बुआई का समय निकला जा रहा है। किसान बीज और खाद का इंतजाम नहीं कर पा रहा है। धनाभाव के कारण पूरे प्रदेश में इस वर्ष रवी की बुआई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। नोट बंदी से बाजार में किसानों का पांच सौ और एक हजार का नोट नहीं लिया जा रहा है। बैंकों और ए.टी.एम. की स्थिति बहुत ही खराब हो गयी है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में न ही बैंकों की और न ही एटीएम की सुविधा है जिससे किसान दोहरी मार झेलने के लिए विवश है और पीड़ित है तथा पूरे प्रदेश में रवी की बुआई का संकट खड़ा हो गया है।


श्री प्रसाद ने कहा कि खरीफ की फसल तैयार हुए लगभग एक माह अधिक समय बीत चुके हैं, किन्तु अधिकांश जनपदों में धान के क्रय केन्द्र नहीं खुले हैं, सरकारी क्रय केन्द्रों पर धान खरीद नगण्य है और बाजार में भी धान की खरीद लगभग बंद है। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा 1470 रूपये निर्धारित है लेकिन आज किसान अपने खून-पसीने से तैयार की गयी धान की उपज को लेकर बिचौलियों के हाथों ठगा जा रहा है और अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औने-पौने दामों 800रूपये से 850 रूपये प्रति कुन्तल बेचने के लिए विवश है।


कांग्रेस पार्टी किसानों के बकाये गन्ना मूल्य का भुगतान अविलम्ब किये जाने, सरकारी धान क्रय केन्द्रों को चालू किये जाने एवं गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 350 रूपये प्रति कुन्तल की घोषणा किये जाने की मांग करती है। यदि किसानों की मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया जाता है तो कांग्रेस पार्टी किसानों के हितों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।

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