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20 जून से शुरू होगी हौसला पोषण योजना

 Sabahat Vijeta |  2016-05-30 17:40:24.0


  • मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों के लिए समेकित योजना (हौसला पोषण योजना) आगामी 20 जून से लागू करने का निर्णय लिया

  • मुख्यमंत्री ने योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जनपद श्रावस्ती के एक गांव को ‘राज्य पोषण मिशन’ के अन्तर्गत गोद लेने का भी निर्णय लिया

  • गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों को गर्म पका-पकाया भोजन और एक फल दिया जाएगा

  • योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों को एक पूर्ण आहार और पोषण विषयक परामर्श उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका नियमित वजन लिए जाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी

  • अब तक 7,643 ग्राम सभाएं गोद ली गईं

  • बेसिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2016-17 से पोषण विषय को शामिल करने का निर्णय

  • मुख्यमंत्री ने राज्य पोषण मिशन की प्रगति की समीक्षा की


akhilesh  1लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों (7 माह से 3 वर्ष की आयु वाले बच्चों) के लिए एक समेकित योजना (हौसला पोषण योजना) आगामी 20 जून से लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह फैसला आज यहां आयोजित राज्य पोषण मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान लिया। उन्होंने इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जनपद श्रावस्ती के एक गांव को ‘राज्य पोषण मिशन’ के अन्तर्गत गोद लेने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने मुख्य सचिव से भी अपेक्षा की है कि वे बहराइच जनपद के एक गांव को गोद लें। बैठक में सांसद कन्नौज श्रीमती डिम्पल यादव भी उपस्थित थीं।


यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि योजना के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों को एक पूर्ण आहार और पोषण विषयक परामर्श उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका नियमित वजन लिए जाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इन गर्भवती महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों को गर्म और पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें एक फल भी खाने के लिए मुहैया कराया जाएगा।


प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना का ट्रायल जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा समस्त गोद ली गई ग्राम सभाओं में किया जा चुका है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि मण्डलायुक्तों, जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों एवं मण्डलीय व जनपदीय अधिकारियों द्वारा अब तक 7,643 ग्राम सभाएं गोद ली जा चुकी हैं। जिला प्रशासन द्वारा मासिक समीक्षा कर मिशन की गतिविधियों का प्रभावी अनुश्रवण भी किया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत 6 सहयोगी विभागों के मध्य आवश्यक समन्वयन के दृष्टिगत मुख्य विकास अधिकारी को मिशन का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नामित किया गया है।


राज्य पोषण मिशन के अन्तर्गत अतिकुपोषित बच्चों के वजन की मासिक ट्रैकिंग, उनके पोषण की स्थिति के श्रेणीकरण एवं जनपदस्तरीय अनुश्रवण के डाटा की अपलोडिंग ‘सुपोषण वेबसाइट’ पर की जाएगी। पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएं मासिक स्तर पर प्रदान करने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र के स्तर पर मौजूद प्लेटफॉर्म को और अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाया जाएगा।


सितम्बर, 2015 के दौरान मिशन के तत्वावधान में बच्चों में कुपोषण की स्थिति के आकलन के लिए वजन दिवस का आयोजन किया गया था। इसके फलस्वरूप आईसीडीएस विभाग द्वारा परम्परागत रूप से चिन्हित लगभग 1.6 लाख अतिकुपोषित बच्चों की संख्या अब बढ़कर 14 लाख हो गई है।


इसी प्रकार सितम्बर, 2015 के मध्य मिशन के तत्वावधान में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर की जांच हेतु अभियान के रूप में मातृत्व सप्ताह का आयोजन किया गया था। इसके परिणामस्वरूप प्रसव पूर्व पंजीकरण की संख्या 29 लाख से बढ़कर 37 लाख (25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी) हो गई। इस अभियान के तहत एक लाख महिलाएं अतिगम्भीर गर्भावस्था में पहली बार चिन्हित हुईं।


लगभग 2.2 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, आशाओं एवं एएनएम को ।।। प्लेटफॉर्म के रूप में प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि इनके द्वारा वीएचएनडी में दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। लगभग 45,000 ग्राम प्रधानों का पोषण सम्बन्धी अभिमुखीकरण भी कराया जा रहा है।


गोद ली गई ग्राम सभाओं में अतिकुपोषित बच्चों में सुधार की स्थिति के विषय में प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश स्तर पर यह सुधार 21.4 प्रतिशत है, जबकि गोद ली गई समस्त ग्राम सभाओं में यह 24.5 प्रतिशत है। प्रदेश के विभिन्न जिलाधिकारियों द्वारा गोद ली गई ग्राम सभाओं में सुधार की स्थिति 35.6 प्रतिशत है, जबकि मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गोद ली गई ग्राम सभाओं में यह सुधार 30.2 प्रतिशत है।


प्रवक्ता ने कहा कि समाज में पोषण के प्रति जागरूकता लाने की दृष्टि से बेसिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2016-17 से पोषण मिशन को सम्मिलित किया जाएगा। इसके अन्तर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 के पाठ्यक्रम में पोषण मिशन से सम्बन्धित विभिन्न गतिविधियों जैसे पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से सम्बन्धित अध्यायों को शामिल किया जाएगा।


प्रवक्ता ने बताया कि राज्य पोषण मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार के दृष्टिगत पोषण से सम्बन्धित 5 विज्ञापन फिल्मों एवं 5 रेडियो जिंगिल्स तैयार कराए जाएंगे और उनका टीवी चैनलों एवं रेडियो पर सूचना विभाग के माध्यम से प्रसारण सुनिश्चित कराया जाएगा। इसके अलावा, 2.3 लाख पोषण विषयक कैलेण्डरों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, मुख्यमंत्री की तरफ से सभी विधायकों, ग्राम प्रधानों, ग्राम सभाएं गोद लेने वाले अधिकारियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों/आशा/एएनएम को 3.5 लाख ऐडवोकेसी पत्रों का भी वितरण किया जाएगा।


प्रवक्ता ने कहा कि पोषण मिशन को मजबूती प्रदान करने की दृष्टि से उत्तर प्रदेश को जो पोषण के क्षेत्र में बेस्ट प्रैक्टिसेस के आदान-प्रदान के लिए एक विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म है, में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 57 देशों के इस प्लेटफॉर्म में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के बाद शामिल होने वाला एक मात्र राज्य है।


बैठक के दौरान मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमख सचिव वित्त राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव बाल विकास पुष्टाहार श्रीमती डिम्पल वर्मा, सचिव बेसिक शिक्षा अजय कुमार सिंह तथा महानिदेशक राज्य पोषण मिशन कामरान रिज़वी उपस्थित थे।

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