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बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल को मायावती ने बताया जायज़

 Avinash |  2017-03-01 17:28:40.0

बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल को मायावती ने बताया जायज़

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों की माँगों का समर्थन व इस सम्बंध में उनकी कल हुई देशव्यापी हड़ताल को जायज़ ठहराते हुये कहा कि 'नोटबन्दी' के अपरिपक्व फैसले के दुष्प्रभाव से देश की जिस 90 प्रतिशत ग़रीब, मज़दूर व मेहनतकश आमजनता को लगातार जनपीड़ा झेलनी पड़ी है उसमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार को इनकी माँगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिये।

मायावती ने कहा कि नोटबन्दी का केन्द्र सरकार का फैसला अपरिपक्व व बिना पूरी तैयारी के ही था जिसे जबर्दस्ती भारतीय रिजर्व बैंक पर थोप दिया गया, जिससे आमजनता के साथ-साथ बैंकों के लाखों कर्मचारियों को जो कष्ट व पीड़ा झेलनी पड़ी है वह भी अभूतपूर्व है। इस नोटबन्दी के कारण बैंकिंग व्यवस्था पर से भी लोगों का विश्वास घटा है, क्योंकि सरकार के नये-नये नियम-कानून के कारण बैंक शाखायें एक प्रकार से पुलिस थानों में परिवर्तित होती जा रही है जहाँ लोग बहुत मजबूरी में ही जाना चाहते हैं।

इसके अलावा, महाराजगंज व देवरिया में नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन को लोकसभा आमचुनाव की तरह ही केवल जुमलेबाजी व हवा-हवाई बातों एवं लुभावने वायदों वाला बताते हुये मायावती ने कहा कि ऐसी बातों का अब उत्तर प्रदेश की आमजनता पर कोई भी प्रभाव पड़ने वाला नहीं है क्योंकि वे इनकी चुनावी वादाखिलाफी को देख व उसके दर्द को देख चुकी है। नरेन्द्र मोदी ने लोगों को अपनी इसी प्रकार की बातों से यहाँ की जनता को वरग़ला कर खुद तो सत्ता प्राप्त करके प्रधानमंत्री बन गये परन्तु उत्तर प्रदेश को बेहाल व बदहाल एवं उपेक्षित ही छोड़ दिया है। अपना जनहित से सम्बंधित कोई भी वायदा यहाँ नहीं निभाया, जबकि इनकी सरकार को लगभग तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं।

इसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज फिर अपने सम्बोधन में अर्थव्यवस्था के विकास के सम्बंध मे जनता को भ्रमित करने व उन्हें वरग़लाने का प्रयास किया। 'नोटबन्दी' को उन्होंने 'काम' बताने की आज फिर भरपूर कोशिश की जबकि वास्तव में यह उनकी भाषा में यह उनका 'कारनामा' है, जिससे देश भर में और ख़ासकर उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हुई है।

इसी प्रकार, मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा 'विकास की कहानी' केवल भ्रमित करने व लोगों की आँखों मे धूल झोकने वाला है क्योंकि इसमें आमजनता को 'रोजगार' दिलाने की असली जरूरत उसी प्रकार से गायब है जिस प्रकार से मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में विकास का असली लाभ इसके असली हकदार देश के गरीबों को नहीं मिलकर इसका लाभ केवल बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों को ही इसका लाभ मिला था और वे और भी ज्यादा धनवान बनते जा रहे हैं।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश विधानसभा आमचुनाव में बीजेपी की हालत शुरू से ही ख़राब रही है, यह सभी जानते हैं फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुमत प्राप्त करने का दावा इनकी कोरी जुमलेबाजी व हवा-हवाई बाते हैं, जिससे प्रदेश की आमजनता इनके बहकावे में अब और आने वाली नहीं है।
इतना ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह बार-बार कहना कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान सपा सरकार के दौरान पुलिस थानों को समाजवादी पार्टी के गुण्डे चलाते रहे बहुत ही दुःख व दुर्भाग्य की बात है क्योंकि ऐसा घोर अनर्थ यहाँ प्रदेश में होता रहा और देश के प्रधानमंत्री जो स्वयं उत्तर प्रदेश से चुने हुये सांसद है वह पिछले लगभग तीन वर्षों से चुपचाप आराम से कुम्भकर्ण की नींद सोते रहे और अब चुनावी स्वार्थ में इन बातों का उल्लेख कर रहे हैं। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि देश के प्रधानमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है बल्कि पूरी तरह से गैर-जिम्मेदार रहे हैं।

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