प्रशासन के बाद अब सियासत की पारी खेलेगा ये IAS अफसर

 2017-02-06 07:24:44.0

प्रशासन के बाद अब सियासत की पारी खेलेगा ये IAS अफसर

उत्कर्ष सिन्हा 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में नौकरशाहों का रिटायरर्मेंट के बाद राजनीति में आना कोई नयी बात नहीं है. कुछ को सफलता मिली तो कई इतिहास के पन्नो में समां भी गए. लेकिन इसी अपक्षाओं से यूपी की नौकरशाही का राजनितिक चरित्र भी उभरा है.

प्रदेश के प्रभावशाली नौकरशाह रहे पीएल पूनिया फिलहाल कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. 2017 के चुनावो में कई ऐसे नौकरशाह अपनी सियासी पारी खेलने को बेताब हैं जो हाल में ही रिटायर हुए हैं. दबंग पुलिस अधिकारी ब्रजलाल बाद आईएएस अफसर प्रभुदयाल श्रीवास और बादल चटर्जी भी इसी कतार में शामिल हो गए हैं . 

प्रभुदयाल श्रीवास और ब्रजलाल भाजपा में सक्रिय रहे मगर एन वक्त पर पार्टी ने दोनों को किनारे कर दिया. ब्रजलाल को पार्टी ने शुरू में तो बहुत तवज्जो दी मगर बाद में किनारे लगा दिया.इन सबसे अलग बादल चटर्जी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का निश्चय किया है   

बादल चटर्जी यूपी प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे और बाद में प्रमोशन के जीरे आईएएस कैडर में शामिल हो गए. आम तौर पर पूर्वांचल के जिलों में तैनाती के दौर में वे एक लोकप्रिय और सुलभ अधिकारी के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे. अपने सेवाकाल के अंत में वे इलाहबाद के कमिश्नर भी रहे. अपने सियासत में जाने के फैसले को उन्होंने अपनी फेसबुक वाल पर जाहिर किया .

बादल चटर्जी ने लिखा है :- "एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में मेरी कार्यशैली से आप सभी भली भांति परिचित है. मैने अपना संम्पूर्ण सेवाकाल जनहितकारी कार्यो में बिताया परंतु हमेशा राजनीतिक पार्टियों द्वारा मेरा तबादला करा दिया जाता रहा और मुझे जनता की सेवा करने से वंचित कर दिया जाता था. अब तक सरकार मुझे तैनात करती थी, अब आप मुझे तैनात करें, मुझे चुने ताकि 5 साल तक मैं आपकी सेवा कर सकूँ और मुझे कोई हटा न पाय."
अपने समर्थको से अपील करते हुए बादल चटर्जी ने कहा है कि - 6 फरवरी 2017 प्रातः 10 बजे मैं अपने निवास दिलकुशा, नया कटरा इलाहाबाद (कारपेंटरी स्कूल के निकट) से पदयात्रा करके अपना नामांकन 262 इलाहाबाद शहर उत्तरी से दाखिल करने कलेक्ट्रेट जाऊँगा आप लोगो से अनुरोध है की मेरा मनोबल ऊँचा करने की कृपा करें.

हालाकि इस सीट पर उनकी चुनौतियाँ कम नहीं है. कांग्रेस के नेता और इलाहाबाद छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अनुग्रह नारायण सिंह सरीखे नेता से उनका मुकाबला है. अनुग्र की इस इलाके में बीते 30 सालों से मजबूत पकड़ रही है. ऐसे में बादल चटर्जी की प्रशासनिक अधिकारी  की छवि कितनी काम आएगी ये तो नतीजा ही बताएगा.


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