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यूपी में मायवती की हार के पीछे है ये प्रमुख कारण

 2017-03-12 10:21:18.0

यूपी में मायवती की हार के पीछे है ये प्रमुख कारण

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. यूपी विधानसभा में बीजेपी के प्रचंड बहुमत के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों को नुकसान हुआ है लेकिन इस हार का सबसे बुरा असर मायावती के राजनितिक कैरियर पर पड़ेगा. कई राजनीतिक पंडितों ने इस हार को मायावती का राजनीतिक पतन बताया है. हालांकि मायावती का आरोप है कि बीजेपी ने ईवीएम मशीनों को 'फिक्स' किया जिसके चलते उनकी पार्टी की ये हालत हुई. लेकिन बारीकी से देखें तो चूक उनकी चुनावी रणनीति में भी हुई है. उन्होंने इस बार फिर दलित-मुस्लिम-अगड़ी जातियों के समीकरण पर दांव लगाया था. इसी फॉर्मूले ने 2007 में उन्हें सत्ता दिलाई थी. बीएसपी ने कुल 99 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा. लेकिन आखिर में इससे मुस्लिम वोटों का विभाजन हुआ और फायदा बीजेपी को पहुंचा.

मायावती के लिए जरुरी था कि वो गैर-जाटव दलित और गैर-यादव ओबीसी वोट को अपने खेमे में लाती. 2014 में दोनों तबकों ने बीजेपी को समर्थन दिया था. बीएसपी ने पिछले साल अगस्त में बाकी पार्टियों से पहले चुनाव का बिगुल फूंका था. अपने प्रचार में उन्होंने दलितों और मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचारों के मसले पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की. दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी को खराब कानून व्यवस्था और अंदरूनी कलह के मुद्दों पर शह और मात देने की कोशिश की.

प्रचार के क्लाइमेक्स तक आते-आते उन्होंने मुस्लिमों को आगाह किया कि वो समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के गठबंधन पर वोट बर्बाद ना करें. लेकिन महज रैलियों में ये मसले उठाना दलितों और पिछड़ों के बीच आरएसएस कैडर की मुहिम का मुकाबला करने के लिए काफी नहीं था. करीब 22.2 फीसदी का वोट प्रतिशत बताता है कि मायावती का कोर वोट बैंक अब भी उनसे छिटका नहीं है. लेकिन उनके सोशल इंजीनियरिंग के आजमाए हुए फॉर्मूले में दूसरी पार्टियों की सेंध लग चुकी है.

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