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मुस्लिम वोटो के बिखराव और अति पिछड़े के समर्थन पर टिकी है पश्चिम में भाजपा की संभावनाएं

 Utkarsh Sinha |  2017-02-10 09:38:19.0

मुस्लिम वोटो के बिखराव और अति पिछड़े के समर्थन पर टिकी है पश्चिम में भाजपा की संभावनाएं

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. यूपी चुनावो के पहले चरण को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस इलाके की 71 सीटो पर 11 फरवरी को जिस तरह वोट पड़ेंगे वह अगले चरणों को बहुत प्रभावित करेंगे . 2014 में इस इलाके ने भाजपा का बहुत साथ दिया था. मगर इस बार स्थितियां बदली हुयी हैं. इन बदली परिस्थिति का सबसे बड़ा कारण है जाटो का भाजपा से मोहभंग और मायावती की मुस्लिम रणनीति. ऐसी स्थिति में कोई सियासी पंडित इस बात का अनुमान लगाने को तैयार नहीं है कि चुनाव का ऊंट किस करवट बैठेगा.

इन सीटो पको प्रभावित करने वाला जाट मतदाता इस बार भाजपा से नाराज होने के साथ साथ प्रायश्चित की मुद्रा में दिखाई दे रहा है. जाटो के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्मेन्द्र मालिक कहते हैं- "जाट इस बार प्रायश्चित करना चाहता है, उसे किसी कि हार जीत से कोई मतलब नहीं है, जाट इस बात से खफा है कि 2013 के दंगो का दाग उसके माथे पर लगा और उसके बाद भाजपा ने हर समय उसका अपमान किया है. इतिहास में जाट कभी दंगो में शामिल नहीं हुआ था , मगर 2013 में उससे गलती हुयी थी. हरियाणा में भी भाजपा ने जाटो को उपेक्षित कर दिया और उनका दमन किया उसके बाद चौधरी अजीत सिंह को अपमानित किया गया. जाट भावनात्मक रूप से वोटिंग करने के मूड में है , उसे सत्ता में भागीदारी की चिंता नहीं है इस बार उसका रुझान अजीत सिंह की तरफ ही है."
दूसरी तरफ कई सीटो को प्रभावित करने की स्थिति में मुस्लिम वोटर है जो फिलहाल सपा –कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच झूल रहा है. बसपा ने बड़ी संख्या में मुस्लिमो को टिकट दिया है. इलाके में दलित वोटरों की तादात भी काफी है जो बसपा के साथ है. ऐसे में इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम वोटो का बंटवारा हो. हलाकि अखिलेश यादव से मुस्लिम नाराज नहीं है और कांग्रेस के साथ आने के बाद इस गठबंधन पर मुस्लिम वोटरों का भरोसा भी बढ़ा दिखाई दे रहा है लेकिन फिर भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अपने बेस दलित वोट और उम्मीदवारों के दम पर मायावती इस वोट बैंक में सेंध न लगा दें. ऐसी स्थिति में सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए राह बहुत मुश्किल हो जाएगी और एक तरह से ध्रुवीकरण की स्थिति बनेगी जिसका फायदा इस चरण के साथ साथ आगे के चरणों में भी भाजपा को ही मिलेगा.

भाजपा ने इस बार अति पिछड़ी जातियों पर दांव खेला है. फिलहाल गुजर और सैनी जैसी दूसरी प्रमुख जातीयाँ भाजपा के साथ फिलहाल खड़ी दिखाई दे रही है. भाजपा की कुल संभावना इसी बात पर टिकी है कि ये जातीय एक जुट रहे और मुस्लिम वोटो का बंटवारा हो जाए ऐसे में भाजपा और बसपा मुख्य लडाई में आ जाएँगी और सपा-कांग्रेस गठबंधन पीछे रह जायेगा.

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