Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

अमित शाह के मंच पर दिखी सोशल इंजीनियरिंग , मगर दिखा मनभेद भी

 Utkarsh Sinha |  2017-01-28 12:07:31.0

अमित शाह के मंच पर दिखी सोशल इंजीनियरिंग , मगर दिखा मनभेद भी

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. शनिवार को लखनऊ में अमित शाह जब भाजपा का संकल्प पत्र जनता के सामने पेश कर रहे थे तब उनके मंच पर भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग भी साफ़ दिखाई दे रही थी. योगी आदित्यनाथ, मनोज सिन्हा, कौशल किशोर, कलराज मिश्र, ओम माथुर , केशव मौर्या के साथ स्वामी प्रसाद मौर्या भी मंच पर थे. मगर लखनऊ के सांसद और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता लाल जी टंडन की गैर मौजूदगी भी बड़े सवाल खड़े कर रही थी.

अमित शाह के कार्यक्रम का संचालन लखनऊ के मेयर और पार्टी उपाध्यक्ष डा. दिनेश शर्मा ने किया. उन्होंने जब एक एक कर नेताओं को मंच पर बुलाना शुरू किया तब साफ़ हो गया कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर भाजपा अपने सोशल इंजीनियरिंग का सन्देश भी स्पष्ट देना चाहती है. पूरा मंच सयोजन ही इस बात की गवाही दे रहा था. मंच पर बैठाया गया हर चेहरा किसी न किसी जातीय समीकरण के आधार पर चुना गया था.

मनोज सिन्हा को पूर्वी उत्तर प्रदेश के भूमिहार जाति का बड़ा चेहरा माना जाता है, कलराज मिश्र और डा. दिनेश शर्मा के जरिये पार्टी ने ब्राह्मणों को सन्देश दिया, तो योगी आदित्यनाथ के जरिये क्षत्रिय और हिंदुत्व के प्रतीक को जगह दी गयी, स्वामी प्रसाद मौर्या और केशव मौर्या पिछड़ा वर्ग के चेहरा थे तो कौशल किशोर दलित चेहरा. इस तरह भाजपा ने मतदाताओं को इस बात का संकेत देने की कोशिश कि है कि उसके साथ सभी जातियों का समर्थन है.

मगर इस मंच पर लखनऊ के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह का न होना सवाल खड़े कर गया. आम तौर पर लखनऊ में इस तरह के बड़े कार्यक्रमों में हमेशा राजनाथ सिंह की मौजूदगी रही है. मगर पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बार राजनाथ सिंह खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्हें अपने बेटे पंकज सिंह को टिकट दिलाने में एडी चोड़ी का जोर लगाना पड़ा मगर मनमाफिक साहिबाबाद की सीट वे नहीं हासिल कर सके. अंततः नोएडा से ही उन्हें संतोष करना पड़ा. इसके अलावा खुद के संसदीय क्षेत्र लखनऊ में भी उनकी बहुत नहीं चली. दूसरी पार्टी से आये रीता बहुगुणा जोशी और नीरज वोरा यहाँ की दो सीटो का टिकट ले गए. सरोजनी नगर सीट पर अब तक फैसला नहीं हो पाया है.

कार्यक्रम के दौरान जब भी पत्रकारों ने पार्टी में विद्रोह के बारे में सवाल किये तब भी अमित शाह इन सवालों को तलने की कोशिश करते दिखे. कभी पार्टी में बहुत मुखर रहने वाले कुछ प्रवक्ता और नेता अपना टिकट काटने के बाद अनमने से दिखे और पत्रकार साथियों से व्यक्तिगत बातचीत में पार्टी में भितरघात के कारण होने वाले नुकसान की संभावना पर चर्चा करने में जुटे रहे.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top