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सामने आई डॉ. हरीओम के ख़्वाबों की हंसी

 Sabahat Vijeta |  2016-10-01 15:11:27.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. हरीओम के ग़ज़ल संग्रह ख़्वाबों की हंसी का आज राजधानी में चल रहे पुस्तक मेले में विमोचन हुआ. मशहूर शायर अनवर जलालपुरी और जाने-माने कवि नरेश सक्सेना ने ख़्वाबों की हंसी का विमोचन किया. डॉ. हरिओम की यह चौथी पुस्तक है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम अच्छे शायर और अच्छे गायक के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं.


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विमोचन के बाद अनवर जलालपुरी ने कहा कि मौत से बचने की एक तरकीब है, दूसरों के ज़ेहन में जिन्दा रहो. उन्होंने कहा कि दुनिया में 750 करोड़ लोग पैदा हुए लेकिन जिन्दा वही रह पाए जिन्होंने लोगों के ज़ेहनों में जिन्दा रहने की कोशिश की. अनवर जलालपुरी ने कहा कि मैंने हरीओम की किताबें पढ़ीं. उन्हें सुना और इस नतीजे पर पहुंचा कि 21 वीं सदी उन्हें भुला नहीं पायेगी. उन्होंने कहा कि बहुत से आईएएस पैदा होते हैं और रिटायर होकर उनका चैप्टर क्लोज़ हो जाता है. लेकिन हरीओम को ईश्वर ने ऐसी कला दी है कि उन्हें अगली सदी में कोई भूलेगा नहीं. अनवर जलालपुरी ने कहा कि हरीओम की शायरी में वक़्त की चट्टान पर खड़े होकर सूरज से आँख मिलाने का फन है.


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विमोचन समारोह की अध्यक्षता कर रहे नरेश सक्सेना ने कहा कि सारी कलाओं का स्वप्न होता है कि वह संगीत हो जाएँ. उन्होंने कहा कि मंजिल पर पहुंचकर भी खुद को बंजारा कहने का जो हुनर हरीओम के पास है वह बना रहे यही दुआ है.


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डॉ. हरीओम की पत्नी मालविका हरीओम ने इस मौके पर हरीओम की जीवनशैली पर रौशनी डालते हुए कहा कि मैंने हरीओम को जितना जेएनयू में जाना वह सबसे अच्छा है. मैं वहीं पर रुक जाना चाहती हूँ. उन्होंने कहा कि हरीओम ने इतनी तरक्की की है तो उसके पीछे हरीओम की रात-दिन की मेहनत है. उन्होंने कहा कि हरीओम खुद यह बात जानते हैं कि जब प्रशासनिक अधिकारी कलाकार होता है तो लोग उसे जल्दी स्वीकार नहीं करते हैं. इसी वजह से इन्होंने खूब मेहनत की. आज भी सुबह उठकर रियाज़ करते हैं. मालविका ने कहा कि मैं भी गाती हूँ लेकिन हरीओम के अन्दर गायकी का जूनून है. जूनून इतना है कि एक बार रात भर घर का दरवाज़ा खुला रहा. सुबह मैंने कहा कि अगर चोर आ जाता तो? इस पर बेटी ने कहा कि अच्छा होता कि चोर आता और हारमोनियम उठा ले जाता. इतना सब होने के साथ ही हरीओम बैडमिन्टन भी खेलने का वक्त निकाल लेते हैं.


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इस मौके पर डॉ. हरीओम ने कहा कि संगीत मुझे गाँव से मिला. खेतों में फसल काटते वक्त औरतें गाती थीं. गाँव में कीर्तन मंडली, जवाबी क़व्वाली और आल्हा के सुर गूंजते थे. मैं तभी से गाने लगा था. उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में सबसे करीब संगीत ही है. बाकी ज़िन्दगी भी संगीत के साथ ही बिताना चाहता हूँ. 2002 में पहली किताब आई थी और आज चौथी किताब भी आ गई. लोगों की मांग पर इस मौके पर हरीओम ने अपनी सुपरिचित ग़ज़ल मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूँ, सिकंदर हूँ मगर हारा हुआ हूँ भी सुनाई.


यतीन्द्र मिश्र के संचालन में हुए विमोचन समारोह में वाणी प्रकाशन के अरुण माहेश्वरी ने सभी का आभार प्रकट किया.

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