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उपलब्धियों से ज्यादा विवादों के साथी रहे कठेरिया

 Sabahat Vijeta |  2016-07-05 18:22:34.0

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दिलीप सुराना


आगरा. आगरा के सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. राम शंकर कठेरिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस्तीफा सौंप दिया. 19 महीने तक केन्द्र में मंत्री रहने के बाद वह उपलब्धियों से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में रहे. उनके आगरा के खंदारी परिसर स्थित आवास पर सुबह से ही लोगों की भीड़ रही. मंगलवार सुबह 11 बजे पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 19 नए मंत्री बनाए.


केन्द्रीय मंत्री डॉ. राम शंकर कठेरिया के भविष्य को लेकर सुबह से ही आगरा में लोग टीवी चैनल पर नज़रें गड़ाये थे. दोपहर 12. 15 पर पीटीआई के हवाले से ब्रेकिंग चली कि डॉ. राम शंकर कठेरिया, निहालचंद, सांवर लाल जाट, मनसुख भाई डी वासा और एमके कुंदरिया को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया है. इन्होंने पीएम मोदी को इस्तीफा सौंप दिया है.


मूल रूप से एटा निवासी पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. राम शंकर कठेरिया आरएसएस के सक्रीय सदस्य रहे हैं. कानपुर से पढाई के बाद उन्होंने अम्बेडकर विवि, आगरा के केएमआई संस्थान में हिंदी के शिक्षक के पद पर ज्वाइन किया था. इसके साथ ही भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे. सांसद चुने जाने के बाद डॉ. राम शंकर कठेरिया को पीएम मोदी ने नवम्बर 2014 में केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री बना दिया था. इसके बाद से उनके साथ विवाद जुड़ते चले गए और उनके बदले व्यवहार से वे पार्टी के कार्यकर्ताओं के निशाने पर भी आने लगे.


कठेरिया को दलित और पिछडी जाति के लिए मंत्री बनाया गया था लेकिन उन्होंने उन्हें भी नाराज कर दिया. पीएम मोदी ने उन्हें यूपी से दलित और पिछडी जाति के वोट बैंक को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन जैसे बड़े मंत्रालय का राज्य मंत्री बनाया था. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी को डॉ. कठेरिया से बहुत ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने दलित और पिछड़ी जाति से भी दूरी बना ली और बड़े कारोबारियों के साथ लॉबिंग करने में जुट गए. इससे स्थानीय भाजपा संगठन में भी दरार पड गई. भाजपा की महिला नेत्री डॉ कुंदनिका शर्मा के पार्टी छोडने के बाद भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने विवादास्पद बयान दिए थे. इसके बाद से संगठन भी उनसे नाराज हो गया.


डॉ. कठेरिया पर फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बनने का आरोप लगा था. यह आरोप बसपा से लोकसभा प्रत्याशी कुंवर चंद वकील ने लगाया था, लेकिन बाद में उन्हें इसमें क्लीन चिट मिल गई. उनके साथ दूसरा विवाद मंत्री और शिक्षक दोनों के लाभ एक साथ लेने का लगा. केन्द्रीय मंत्री के लिए दिल्ली में आवास और आगरा में भी निजी आवास होने के बाद भी विवि के खंदारी परिसर में शिक्षक आवास में रहना और वहां अवैध निर्माण कर कार्यालय बनाना, इसके लिए एनएसयूआई विरोध कर रहा था. उन्होंने आगरा के चुनिंदा कारोबारियों से नजदीकी बना ली जबकि आम जनता से दूरी बना ली. उन्होंने स्थानीय भाजपा के पदाधिकारियों को भी तवज्जो देना बंद कर दिया था.

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