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राजभवन में हुई राज्यपाल की पुस्तक चरैवेति! चरैवेति!! पर चर्चा

 Sabahat Vijeta |  2016-11-23 16:37:36.0

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लखनऊ. राजभवन लखनऊ में आज उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की पुस्तक के हिंदी एवं उर्दू संस्करण पर चर्चा हेतु ‘इन-हाउस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक, उनकी पत्नी श्रीमती कुंदा नाईक, प्रमुख सचिव सुश्री जूथिका पाटणकर, सचिव चन्द्रप्रकाश, विधि परामर्शी एस.एस. उपाध्याय सहित राजभवन के समस्त अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। इस अवसर पर दूरदर्शन केन्द्र लखनऊ के कार्यक्रम अधिशासी आत्म प्रकाश मिश्र तथा डाॅ. अब्बास रज़ा नैय्यर विभागाध्यक्ष उर्दू लखनऊ विश्वविद्यालय ने पुस्तक के हिंदी और उर्दू अनुवाद के चुनिंदा अंश अपने विशिष्ट अंजाद में पढ़कर कार्यक्रम को जीवंत बनाया।


राज्यपाल राम नाईक ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में राजभवन की गरिमा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक कार्य पद्धति से बनी है। अधिक अच्छा काम करके राजभवन की गरिमा को बढ़ाने के लिए सभी का योगदान जरूरी है। उन्होंने पुस्तक चरैवेति! चरैवेति!! में सहयोग करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि कभी संस्मरण लिखने के बारे में नहीं सोचा था मगर किताब लिख भी गयी और चार भाषाओं में अनुवाद होकर सफल लोकार्पण भी हो गया। वास्तव में संस्मरणों को याद करना एवं लिखना आसान नहीं होता है, मगर वार्षिक कार्यवृत्त में संजोयी यादों के माध्यम से एक किताबी शक्ल आ सकी है। राज्यपाल ने राजभवन में आयोजित आज के कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि वैसे तो चरैवेति! चरैवेति!! के लोकार्पण के सारे कार्यक्रम बहुत शानदार रहे लेकिन ‘‘आज का कार्यक्रम श्रम परिहार का कार्यक्रम मानता हूँ।’’ उन्होंने कहा कि लोगों में पुस्तक के प्रति रूचि और उत्सुकता के कारण शीघ्र ही पुस्तक के द्वितीय संस्करण को प्रकाशित करने पर भी विचार किया जायेगा।


श्री नाईक ने बताया कि अब तक चरैवेति! चरैवेति!! के चार कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिसमें मुंबई में 25 अप्रैल, 2016 को मराठी संस्करण का लोकार्पण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस द्वारा किया गया। दूसरा गरिमापूर्ण कार्यक्रम गत 9 नवम्बर को राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जिसमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और गुजराती संस्करण का लोकार्पण किया गया। राजभवन लखनऊ में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी की उपस्थित में गत 11 नवम्बर को हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया गया तथा मुंबई में गत 13 नवम्बर को गुजराती संस्करण का लोकार्पण सम्पन्न हुआ।


प्रमुख सचिव सुश्री जूथिका पाटणकर ने कहा कि पुस्तक को पढ़ने के बाद मन में एक आदर्श राजनेता कैसा हो इसका विचार आता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डाॅ. प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित लोकार्पण समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि ‘‘मैं इस बात के लिए उत्सुक रहता हूँ कि राज्यपाल राम नाईक अपनी मासिक रिपोर्ट में क्या-क्या नये सुझाव भेजेंगे।’’ उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से पाठक को स्वयं में बदलाव लाने हेतु दायित्व का बोध होता है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।


कार्यक्रम में विधिक परामर्शदाता एस.एस. उपाध्यान ने राज्यपाल राम नाईक के जीवन और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की और उपनिरीक्षक राजभवन सुरक्षा कुलदीप सिंह ने स्वरचित कविता का पाठन किया।

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