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प्रदेश में चारों तरफ अनर्थ-ही-अनर्थ : मायावती

 Vikas Tiwari |  2016-12-17 11:49:43.0

mayawati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश मायावती ने कहा कि वर्तमान सपा सरकार के शासनकाल में अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था का हर स्तर पर बहुत ही बुरा हाल है और हर प्रकार के अपराध चरमसीमा पर हैं और चारों तरफ अराजकता फैली हुई है, वास्तव में यह वर्तमान सपा सरकार की जातिवादी नीतियों व गलत कार्यशैली का ही परिणाम है कि प्रदेश में चारों तरफ अनर्थ-ही-अनर्थ हो रहा है और प्रदेश की आमजनता मुसीबतों व परेशानियों का पहाड़ झेल रही है। साथ ही सपा सरकार द्वारा आज भी प्रदेश में अधकच्चे कार्यों का उद्घाटन/लोकार्पण आदि करने से इनको कोई खास राजनैतिक लाभ मिलने वाला नहीं है।


मायावती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार व भाजपा पर नोटबन्दी से उत्पन्न गम्भीर जनसमस्या व जनपीड़ा की आपराधिक अनदेखी के साथ-साथ उनसे जनता के साथ ’इण्डिया शाइनिंग’ जैसी अटखेलियाँ करने का जुर्म करने का आरोप लगाते हुये कहा कि देश की लगभग 90 प्रतिशत आम जनता को आज़ाद भारत की यह सबसे ज्यादा दुःख व तकलीफ देने व ‘‘उनके चेहरों का नूर उतारने’’ वाली सरकार साबित हुयी है तथा जनहित व जनकल्याण के प्रति ऐसी बेपरवाह व ग़ैर-जिम्मेंदार सरकारों को जनता कभी भी माफ नहीं करती है।


बीएसपी राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि भाजपा के नेतागण व केन्द्र की भाजपा सरकार एवं उनके मंत्रीगण नोटबन्दी के अभूतपूर्व फैसले की वैसी ही वाहवाही कर रहे हैं जैसे इनकी पूर्व की केन्द्र की सरकार में ’इण्डिया शाइनिंग’ कि वाहवाही करके देश की आमजनता की दुःख-तकलीफों का मज़ाक उड़ाया था।


भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने ना तो सन् 2004 के ’इण्डिया शाइनिंग’ से कुछ सबक सीखा है और ना ही ख़ासकर उत्तर प्रदेश के अपने सांसदों की फीडबैक से सबक सीखने की कोशिश कर रही हैं कि 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी के अधकच्चे व अपरिपक्व फैसले के कारण देश की 90 प्रतिशत आमजनता का हाल काफी ज्यादा बेहाल हो रहा है और भारत एक संकटग्रस्त देश बन गया है, जहाँ लोग अपनी कमाई के पैसे के लिये भी मोहताज बन कर रह गये हैं।


ऐसी व्यवस्था को, जिसमें लोगों का अपना पैसा अपना नहीं रह जाये, भला कौन सराह सकता है, फिर भी इस जनपीड़ा को महसूस कर उसका उचित समाधान निकालने के बजाय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व व केन्द्रीय मंत्रीगण बी.एस.पी. सहित उन विपक्षी पार्टियों की आलोचना कर रहे हैं व कह रहे हैं कि नोटबन्दी से आमजनता की नहीं बल्कि प्रतिपक्षी पार्टी के नेताओं की ’हवाइयाँ’ उड़ी हुयी हैं। भाजपा व उसकी सरकार की इस प्रकार की जन उपेक्षा व अहंकारी रवैया अति-निन्दनीय है तथा बी.एस.पी. इसकी तीव्र निन्दा करती है।


उन्होंने आगे कहा कि दिनांक 8 नवम्बर 2016 के नोटबन्दी के एकतरफा, मनमाने व तानाशाही प्रवृति वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले के 39वें दिन भी आज पूरे देश में हर तरफ अफरातफरी का माहौल है, बैंकों में संकट है और लोगों में कंगाली व्याप्त है, परन्तु केन्द्र की भाजपा सरकार अपने अड़ियल रुख़ पर कायम है कि देश में सबकुछ समान्य है तथा आम जनता नहीं बल्कि केवल ’’बेईमान’’ लोग ही परेशान है। इस प्रकार के अपने गैर-ज़िम्मेंदाराना रवैये से मोदी की सरकार ने देश की 90 प्रतिशत ग़रीब, मज़दूर, किसान, कर्मचारी व अन्य मेहनतकश जनता को ’बेईमान’ घोषित कर दिया है, जो घोर सरकारी अन्याय व बर्बरता भी है।


वास्तव में नोटबन्दी के अपरिपक्व फैसले के कारण देश भर में बैंकों व ए.टी.एम. के बाहर लम्बी कतार में खड़े मेहनतकश लोगों की मुसीबत कम होने को नाम ही नहीं ले रही हैं। उन्हें वह थोड़ा पैसा भी अपने निजी खर्च के लिये नहीं मिल पा रहा है जिसका वायदा सरकार ने नोटबन्दी के समय में किया था। यह सरकार की घोर विफलता नहीं तो और क्या है?


इससे लोगों का धैर्य अब समाप्त होता जा रहा है तथा अब यह क़ानून- व्यवस्था की नई समस्या में बदलता जा रहा है और उन्हें पुलिस के डण्डे भी खाने पड़ रहे हैं। ऐसे में राज्य की सरकारों की भूमिका बहुत अहम हो जाती है कि वे वास्तव में जनता के दुःख-दर्द के साथ हैं या फिर केन्द्र की जनविरोधी नीति के साथ। इस मामले में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का रवैया भी जन सहयोग का नहीं बल्कि अपनी पुरानी मित्र व सहयोगी पार्टी भाजपा के साथ सुर में सुर मिलाने का ही लगता है।


इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की जनता, बीजेपी के कल्याण सिंह का ऐसा राज नहीं चाहती है, जो खासकर कानून-व्यवस्था के मामले में, पांच साल से पहले ही यहाँ अपनी सरकार को गवां बैठे और अपने साथ-साथ जनता को भी मुश्किल में डाल दे।


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