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पढ़ाते-पढ़ाते मौत को गले लगा गए कलाम

 Sabahat Vijeta |  2016-06-12 16:03:02.0


kalamलखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज सरदार भगत सिंह कालेज में पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्वर्गीय ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रतिमा का अनावरण एवं ‘ओपन आडिटोरियम‘ का उद्घाटन किया. इस अवसर पर कुलपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह, स्वामी मुक्तिनाथानंद महाराज, समाजसेवी करूणा शंकर ओझा सहित अन्य विशिष्ट जन व छात्र-छात्रायें उपस्थित थे.


राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि उच्च शिक्षा में ज्ञान और संस्कार मिलते हैं तो अच्छी शिक्षा प्राप्त होती है. कालेज का नाम शहीद भगत सिंह से जुड़ा है. जब नाम जुड़ता है तो छात्र, शिक्षक, प्राचार्य एवं संचालक का दायित्व होता है कि नाम के अनुसार कार्य निष्पादित किया जाये. कालेज परिसर में डाॅ. कलाम की प्रतिमा लगने से कालेज की विशेषता में वृद्धि हुई है. छात्र एवं महाविद्यालय परिवार डाॅ. कलाम के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर ध्यान दें. उन्होंने कहा कि डाॅ. कलाम के जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर देश को आगे बढ़ाने का कार्य करें.

श्री नाईक ने कहा कि डाॅ. कलाम आम परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचे. वे भारतीय संस्कृति के पुजारी थे. गीता, कुरान और बाईबिल की समानता बताने का उनका अपना दृष्टिकोण था. राष्ट्रपति पर के दायित्वों से निवृत्त होने के बाद वे अंतिम सांस तक शिक्षक की भूमिका में देश की पूंजी युवा वर्ग की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सक्रिय रहे. इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे पढ़ाते-पढ़ाते मृत्यु प्राप्त हुई हो. उनका पूरा जीवन विज्ञाननिष्ठ रहा. डाॅ. कलाम ने अणु ऊर्जा के प्रयोग और सफल परीक्षण का नेतृत्व किया. उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया मगर अणु परीक्षण से भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया.


राज्यपाल ने कहा कि डाॅ. कलाम ने कहा था कि युवा शक्ति देशी की पूंजी है. 2020 तक भारत विश्व का सबसे युवा देश होगा. हम इस पूंजी के उचित मार्गदर्शन से देश के लिए उपयोग कर सकते हैं. राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन की स्पर्धा की तैयारी छात्र जीवन से करें. कालेज उन छात्रों से पहचाना जाता है जो समाज को कुछ देते हैं. उन्होंने व्यक्तित्व विकास के चार मंत्र बताते हुए कहा कि सफल भविष्य के लिये सदैव प्रसन्नचित रह कर मुस्कराते रहे. दूसरे के अच्छे गुणों की प्रशंसा करें तथा अच्छे गुणों को आत्मसात करने की कोशिश करें. दूसरों को छोटा न दिखाये और हर काम को और बेहतर ढंग से करने का प्रयास करें. कार्यक्रम में कुलपति विनय पाठक, करूणा शंकर ओझा सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखें.

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