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सपनों के सौदागर है प्रधानमंत्री और अमित शाह

 Sabahat Vijeta |  2016-06-07 16:31:59.0

modi-shahतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किस तरह गलत बयानबाजी करते है यह उन्होने अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान साफ कर दिया है. देश की जनता अब ये समझ चुकी है कि अगर देश ने 10 सालों तक चुपचाप रहने वाले प्रधानमंत्री को देखा है तो अब पिछले दो सालों से कुछ करने वाला नही सिर्फ बोलने वाला प्रधानमंत्री को देख रही है. इन दो सालों में बीजेपी ने सिर्फ वादा खिलाफी की है, जनता की उम्मीदों के साथ विश्वासघात किया है. अमित शाह के मुह से विकास की बात सिर्फ छलावा है क्योंकि उन्होने अपनी प्रेसवार्ता में साफ किया है कि मंदिर निर्माण उनके एजेंडे में है. बीजेपी सिर्फ देश को तोड़ने की सियासत करना जानती है. देश के प्रधानमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सपनों के सौदागर हैं लेकिन जनता उनकी चाल को अच्छी तरह समझती है.


यूपी के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि जिस तरह से 2004 में जनता ने इंडिया शाइनिंग की हवा निकाल कर 10 साल तक बीजेपी को सत्ता से दूर रखा था और अब देश बदल रहा है के जुमले के साथ बीजेपी अपना प्रचार अभियान चला रही है लेकिन देश की जनता दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल की तरह यूपी में भी सबक सिखायेगी. लोगों को गुमराह करने के उस्ताद अमित शाह एसपी और बीएसपी पर सांठ – गांठ का आरोप लगा रहे हैं लेकिन देश की जनता को बीएसपी और बीजेपी में राखी के नाम पर 3 बार नापाक गठबंधन देखने को मिला है. भाई बहन के प्यार के चलते ही बीजेपी ने 3 बार यूपी में बीएसपी की सरकार बनवायी और बदले में मायावती ने अल्पसंख्यकों का नरसंघार करने वाली गुजरात सरकार का प्रचार किया.


श्री यादव ने कहा कि अमित शाह यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे है और मथुरा कांड में बिना सबूत के अर्नगल अलाप करते हुए हमारा इस्तीफा मांग रहे हैं. लेकिन उनको ये राग अलापने से पहले हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, जानमाल के नुकसान और महिलाओँ के साथ हुए जघन्य कांड को याद करना चाहिए और सबसे पहले उन्हे अपने चहेते हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का इस्तीफा मांगना चाहिए था. जहा सीधे तौर पर हिंसा को नियंत्रित न कर पाने के लिए हरियाणा की सरकार जिम्मेदार थी वही गुजरात में हार्दिक पटेल की अगुवाई में हुए पटेल आंदोलन में पूरा गुजरात हिंसा के चपेट में रहा जिसको नियंत्रित करने में गुजरात की सरकार पूरी तरह विफल रही. उसके लिए उन्हे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उत्ताधिकारी गुजरात की मुख्यमंत्री आंनदी बेन पटेल से इस्तीफा मांगना चाहिए था लेकिन उस समय नातो उन्हे राजधर्म याद आया और नाहि नैतिकता और अब अमित शाह यूपी के मसले में अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के फिराक में बिना तथ्य के बयानबाजी कर रहे हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने की कोशिश भी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को अपराध के मामले में कटघरे में खड़ा करने से पहले अमित शाह को देश की राजधानी के बारे में भी सोचना चाहिए जो अपराध की राजधानी बन चुकी है जहा पर विदेशी छात्रा की दिन दहाड़े हत्या कर दी जाती है और गृहमंत्री मूकदर्शक बने रहते है बीजेपी और अमित शाह को यूपी सरकार के खिलाफ बोलने से पहले दिल्ली, हरियाणा और गुजरात की स्थिती पर पुन: आत्म मंथन करना चाहिए.


यूपी सरकार जनता से किए अपने वादों पर खरी उतर रही है जिसका फैसला 2017 में जनता करेगी. बीजेपी को नसीहत हैं कि वो गुजरात से तड़ीपार रह चुके और दंगे की आँच में जेल की हवा खा चुके अमित शाह पर नियंत्रण रखे क्योंकि ये पार्टी में अपने जैसे अपराधियों की टीम तैयार कर रहे हैं जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर केशव प्रसाद मौर्या की नियुक्ति है. बीजेपी की कोशिश है कि प्रदेश की जनता को धर्म के नाम पर लड़ाकर 2017 का चुनाव जीता जाये लेकिन यूपी सरकार उनके मनसूबों को कामयाब नही होने देगी.

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