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ये खतरनाक की‍ड़ा लगा रहा था 'ताजमहल' में दाग

 Tahlka News |  2016-05-06 13:32:49.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
आगरा. आस्ट्रेलिया की एक झील सहित कई देशों में टूरिस्ट प्वाइंटों को प्रभावित करने वाला ‘गोल्डीकाइरोनोमस’ प्रजाति का कीड़ा ही ताजमहल के धवल सौंदर्य पर दाग लगा रहा है। इसकी जांच कर रही सेंट जोंस कॉलेज के एंटोमोलॉजी विभाग की टीम ने कीड़े की प्रजाति की पहचान कर ली है। टीम के मुताबिक यमुना नदी में प्रदूषण से पनप रहे ये कीड़े पीछे की तरफ से उड़कर ताज तक पहुंच रहे हैं। इनकी रोकथाम के जल्द प्रयास नहीं हुए तो ताज की पच्चीकारी के लिए ये बड़ा खतरा भी बन सकते हैं।


पिछले कई दिन से ताजमहल की दीवारें और पच्चीकारी हरे रंग की हो रही थीं। पड़ताल करने पर पता चला कि ताज पर कीड़ों का हमला हो रहा है। लगातार इन कीड़ों की संख्या बढ़ती जा रही है। झुंड में ये कीड़े ताज की दीवारों पर बैठ जाते हैं और लार्वा के साथ अन्य गंदगी छोड़ दीवारें खराब कर रहे हैं। एएसआई की रसायन शाखा इस पर सक्रिय हुई। सेंट जोंस कॉलेज के एंटोमोलॉजी विभाग की टीम के साथ इसकी जांच शुरू कर दी गई। टीम ने ताज में पहुंचकर लार्वा के सैंपल लिए। लैब में जांच के बाद कीड़े की प्रजाति को पहचाना गया है।


एंटोमोलॉजी विभाग के हेड डॉ. गिरीश माहेश्वरी के मुताबिक ‘गोल्डीकाइरोनोमस’ नाम की प्रजाति के कीड़े ताज की खूबसूरती बिगाड़ रहे हैं। विभाग ने प्राथमिक रिपोर्ट एएसआई की रसायन शाखा को दे दी है। डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि दिल्ली में रिपोर्ट जा चुकी है। मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा रही है। इधर, एएसआई की रसायन शाखा के अधीक्षण डॉ. एमके भटनागर का कहना है कि उन्होंने तीन अन्य प्रयोगशालाओं से भी जांच कराई है। इनकी रिपोर्ट के मिलने के बाद कीड़े के नाम के बारे में खुलासा कर दिया जाएगा।


ऐसे बढ़ रहे गोल्डीकाइरोनोमस
डॉ. माहेश्वरी के मुताबिक यमुना में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। पानी के प्रदूषण में फासफोरस अधिक होने से ये कीड़े पैदा हो रहे हैं। मादा कीट एक बार में 700 से 100 अंडे देती है। इसलिए इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इनका लार्वा 15 दिन का होता है। लार्वा एल्गी (सहवाल) खाता है। इसके बाद प्यूमा बनता है और फिर पूरा कीड़ा।


ऐसे पहुंच रहे ताज तक
ये कीड़े पीछे की तरफ यमुना नदी की ओर से उड़कर ताज की दीवारों तक पहुंच रहे हैं। ये झुंड में एक साथ दीवारों पर बैठते हैं। एल्गी के सेवन से ये हरे रंग का पदार्थ वहीं छोड़ देते हैं।


इस तरह हो सकती है रोकथाम
एएसआई की नाक में दम करने वाले गोल्डीकाइरोनोमस कीड़ों की रोकथाम सिर्फ यमुना नदी में प्रदूषण कम करके ही हो सकती है। यमुना में प्रदूषण बढ़ेगा तो इनकी संख्या भी लगातार बढ़ेगी। ताज के साथ नदी किनारे स्थापित एत्मादुद्दौला व अन्य स्मारकों में भी इनका खतरा बना रहेगा। सेंट जोंस कॉलेज की टीम ने एएसआई को फौरी तौर पर ताज के पीछे ऊपर की तरफ इंसैक्ट ट्रैप (कीड़े पकड़ने वाला जाल) लगाने का भी सुझाव दिया है। इन्हें लगाकर कहीं हद तक कीड़ों को ऊपर पहुंचने से रोका जा सकता है।


कई टूरिस्ट प्वाइंट प्रभावित कर चुके हैं कीड़े
डॉ. माहेश्वरी के मुताबिक ‘गोल्डीकाइरोनोमस’ कीड़ा आस्ट्रेलिया में एक झील का पर्यटन पूरी तरह बिगाड़ चुका है। झील पर घूमने के लिए पर्यटक जाना बंद कर चुके हैं। अमेरिका व जापान में भी कई जगह कीड़ा पर्यटन को प्रभावित कर चुका है। जापान में कई जगह इन कीड़ों के हमले से दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। अगर ताज पर इनका हमला नहीं रुका तो यहां के पर्यटन के लिए भी ये खतरा बन सकते हैं।

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