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अपने ज़माने का क्राइम चार्ट तारीख बदलकर सुना रही हैं मायावती

 Sabahat Vijeta |  2016-06-09 14:14:12.0

Mayawatiलखनऊ. समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि बसपा अध्यक्ष को पता नही होता है कि वे किस मुद्दे पर कैसा बयान दे रही है. अपने जमाने के क्राइम चार्ट की तारीख बदलकर अगर वे समाजवादी सरकार के खिलाफ कुप्रचार करना चाहती है तो उन्हें हताशा और अवसाद के अलावा कुछ हासिल नही होने वाला है क्योंकि प्रदेश की जागरुक जनता में उनकी विश्वसनीयता पाँच साल पहले ही समाप्त हो चुकी है.


बसपा प्रमुख के ऊलजुलूल बयान की बानगी यही है कि एक तरफ तो वे मथुरा कांड की सीबीआई जाँच की मांग उठा रही है और दूसरी तरफ यह भी कहती है कि बीजेपी सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है. अपने मामले में ताज कोरिडोर और कुछ आय के मामलों की याद करके वे सीबीआई से डरती हैं. मगर दूसरों के लिए वे सीबीआई की संस्तुति करना चाहती हैं.


कुछ ऐसा ही भ्रामक बयान उनका यह है कि बसपा सरकार आने पर अराजकता खत्म हो जायेगी. अच्छा हो वे अपने जमाने का क्राइम ग्राफ देख लें. कितनी ही दलित किशोरियों से बसपा विधायकों/मंत्रियों ने बलात्कार किया. उनके अपहरण और हत्या में भी वे शामिल रहे जिन्हें अदालत ने लंबी सजाए सुनाई. बाँदा और निघासन कांड, औरैया में इंजीनियर की बसपा अध्यक्ष के जन्मदिन पर चन्दा वसूली में हत्या जैसी घटनांए आज भी भूली नही है. उनके समय दर्जनों घोटालों में 2 लाख 54 हजार करोड़ रुपयों की लूट हुई.


बसपा शासन ने पाँच वर्ष तक उत्तर प्रदेश को अभिशप्त बना दिया था. बसपा राज में सिर्फ भ्रष्टाचार का ही बोलबाला था. पार्कों, स्मारकों पर जनता की गाढ़ी कमाई बेरहमी से लुटाई गई और दलित महापुरुषों से ऊँची बसपा प्रमुख ने अपनी प्रतिमाएं लगवाई थी. उसमें भी मोटा कमीशन वसूलने में चूक नही हुई. स्वास्थ्य सेवाओं में तो ऐसी लूट मची थी कि उसके घेरे में सीएमओ, डिप्टी सीएमओ की भी हत्याएं हो गई थी.


बसपा में असामाजिक तत्वों, माफियाओं, अपराधियों, गुंडो, भ्रष्टाचारियों एवं दुराचारियों की बड़ी जमात है. बसपा अध्यक्ष का इन्हें संरक्षण प्राप्त रहता है. विपक्षी नेता का घर तक जला देने की घटना बसपा राज में हुई. कानून व्यवस्था का मजाक बसपा राज में ऐसा बना कि लोग अंधेर नगरी चौपट राजा का नारा लगाने लग गए थे. लोकतांत्रिक मूल्यों को तिलांजलि देकर संविधान को ताक पर रख दिया था.


समाजवादी सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ऊपर उनके विरोधी भी उंगली नही उठाते हैं. स्वयं बसपा के विधान सभा में नेता विरोधी दल ने भी अखिलेश यादव पर कभी कोई आरोप नही लगाया. बसपा अध्यक्ष को चार वर्ष की विधानसभा कार्यवाही मंगा कर पढ़ लेनी चाहिए. उत्तर प्रदेश की जनता बसपा राज के भ्रष्टाचार और समाजवादी सरकार के विकास कार्यो के बारे में अच्छी तरह जानती है. वह इनकी तुलना कर स्वयं यह निर्णय कर सकती है कि उसे किसका साथ देना है. समाजवादी पार्टी सिद्धान्तों एवं जनसंघर्षो की पार्टी है. साम्प्रदायिकता, जातिवाद एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ उसने सतत संघर्ष किया है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पारदर्शी, निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था के साथ प्रदेश को आदर्श प्रदेश बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए है.

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