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‘सृष्टि  परमात्मा से चलती है और गोविन्द राधारानी से’

 Sabahat Vijeta |  2016-11-09 17:39:32.0

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लखनऊ। सारी सृष्टि परमात्मा से संचालित है और स्वयं गोविन्द राधारानी से। स्त्रीषक्ति ही परमात्मा की शक्ति है। वर्ष में पड़ने वाली चार नवरात्रों में दो नवरात्र चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र अगर महत्वपूर्ण बनी तो प्रभु राम के कारण किन्तु, स्वयं राम भी मातृकृपा अर्थात स्त्री शक्ति की कृपा से ही सफलता अर्जित कर पाए। वासंतिक नवरात्र में वे जन्मे और शारदीय नवरात्र की बेला में रावण का वध कर विजय पाई। ऐसे में आज पुरुष कैसे यह सोच सकता है कि वह बिना स्त्री के कृपा के सफलता पा लेगा!


यह संदेश व्यास पीठ से वृन्दावन के पुरुषोत्तम रामानुजाचार्यजी महाराज ने आज राजाजीपुरम ई-ब्लॉक संत्संग पार्क में 14 नवम्बर तक चलने वाले श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में परीक्षित की कथा का विस्तार करते हुए कथारसिकों को दिया। महत्तम राय सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में तीसरे दिन अपनी कथा में नारी शक्ति का बखान किया।


उन्होंने कहा कि नारी पुत्रों के लिए अहोई जैसा और पति के लिए करवा चौथ जैसे कठिन निर्जला व्रत रखती है और पुरुष उसके ऐसे तप और त्याग को समझ नहीं पाता। पुत्र अपनी माता और पति अगर अपनी पत्नी को ही प्रसन्न रखें तो जीवन में आनन्द और प्रेम आ जायेगा। उन्होंने कहा दुनिया में किसी को पूजो न पूजो मगर अपनी पत्नी को पूज लो अर्थात हर तरह प्रसन्न रखो तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।


नारायण की तीन पत्नियों- भूदेवी अर्थात पृथ्वी, श्रीदेवी अर्थात ऐश्वर्य और महालक्ष्मी की चर्चा करते हुए रामानुजाचार्य महाराज ने चिंता जताई कि महिला की महिमा को लोग अब भी समझ नहीं पा रहे। हजार पुरुषों के मुकाबले में आज नब्बे-सौ महिलाएं कम हो गई हैं। सारे संविधान पुरुषों के बनाए हुए हैं, अभी एक समय ऐसा था जब देश में महिलाशक्ति का राज था परन्तु, हमारी महिलाएं आज भी इतनी भोली हैं कि स्वयं के लिए सदन में 33 प्रतिशत आरक्षण का विधान नहीं बना पाईं।


उन्होंने कहा कि आज इस युग में हमें मातृशक्ति के महत्व को समझने की ज़रूरत है। कथा प्रारम्भ होने से पहले मुख्य यजमान के तौर पर पूर्व सांसद कुसुम राय-राजेश राय दम्पति ने व्यास गद्दी का पूजन कर आरती उतारी।

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