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स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ अफसर-मंत्रियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति

 Tahlka News |  2016-04-02 06:29:15.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
गोरखपुर, 2 अप्रैल. स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने सारे नियम कानून और मेधा को दरकिनार कर कुशीनगर में अपने नाते-रिश्तेदारों को कई पदों पर नियुक्त कर लिया है। मजे की बात यह कि उनका खेल सत्ता के लोग बिगाड़ न दें इसलिए मंत्री-विधायकों को खुश करते हुए उनके करीबियों एवं रिश्तेदारों को भी विभिन्न पदों पर नियुक्त कर दिया गया।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रहे 12 कार्यक्रमों के अंतर्गत कुशीनगर में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ, तकनीकी स्टॉफ आदि के करीब 48 पदों के लिए संविदा पर नियुक्ति के लिए 29 दिसंबर 2015 को आवेदन मांगे गए। इन आवेदनों के सापेक्ष सैकड़ों आवेदन भी आए। फरवरी में साक्षात्कार भी हुआ। उसके बाद रिजल्ट को रोक लिया गया। 31 मार्च 2016 तक हर हाल में नियुक्ति कर देनी थी। लेकिन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का आरोप है कि 31 मार्च 2016 की देर रात तक न तो विभाग ने अपनी साइट पर सूची डाली न ही कहीं चस्पा की। सुबह 1 अप्रैल को आनन फानन में देर रात को सलेक्ट हुए कैंडिडेट्स की सूची सीएमओ दफ्तर पर चस्पा कर दी गई।


मेधा सूची प्रकाशित होते ही कटघरे में आया विभाग
सूची चस्पा होते ही विभाग कटघरे में आ गया। यह इसलिए क्योंकि सूची में विभागीय लोगों के नाते-रिश्तेदारों के सपा के कद्दावर मंत्री-विधायक और नेताओं के करीबियों के भी नाम उसमें थे। आलम यह कि शासन के एक प्रमुख सचिव की सिफारिश पर भी एक नियुक्ति की गई है।


मंत्री और अधिकारियों के करीबियों की हुई नियुक्ति
आरोप है कि जिले से जुड़े प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के करीबी का चयन हुआ है। यहीं के एक राज्यमंत्री के करीबी को भी नियुक्त कर विभागीय जिम्मेदारों ने खुद को सेफ किया है। इसके अलावा करीब आधा दर्जन सपाइयों के करीबियों ने नियुक्ति पाई है। चयन समिति में शामिल अल्पसंख्यक कोटे के एक चिकित्सक के रिश्तेदार को भी उपकृत किया गया है। क्षय रोग विभाग के एक अधिकारी के रिश्तेदार सहित विभाग के कई बाबूओं ने अपने अपनों को नियुक्त करा लिया है।


डीएम साहब जाते-जाते कर गए दस्तखत
महीनों से लंबित इन नियुक्तियों की मियाद जब पूरा होने को आई तो आनन फानन में उसको फाइनल कर दिया गया। यही नहीं डीएम का स्थानांतरण भी काफी मुफीद इन लोगों के लिए साबित हुआ। एक तो 31 मार्च तक ही इन नियुक्तियों की मियाद थी और दूसरा जिले के निजाम को दूसरे जिले में कार्यभार ग्रहण करना था। जाते-जाते डीएम ने भी बिना देर किए नियुक्तियों को हरी झंडी दे दी।

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