आखिर क्यों नियमावली को ही धता बता दिया कमिश्नर साहब ने !

 2016-09-01 07:37:25.0

आखिर क्यों नियमावली को ही धता बता दिया कमिश्नर साहब ने !
तहलका न्यूज ब्यूरो

इलाहबाद. भारी वाहनों को परमिट देने के मामले में इलाहबाद के मंडलायुक्त राजन शुक्ल का एक फैसला चर्चा का विषय बन गया है. सूबे में लागू “मोटर यान नियमावली” को धता बता कर मंडलायुक्त महोदय ने एक ऐसा फैसला कर दिया जिससे न सिर्फ मंडल में भारी वाहनों के परिचालन में बड़ी बाधा उत्पन्न हो गयी बल्कि परिवहन विभाग में भी भयंकर रोष उत्पन्न हो गया. इस बढ़ते विरोध और अधिकारीयों के नाराजगी के कारण दबाव में आये मंडलायुक्त को कुछ ही दिनों के भीतर इस फैसले को वापस लेने पर मजबूर हो जाना पड़ा.


मामला भारी वाहनों को परमिट जारी करने से जुडा है. इसका अधिकार मंडल में गठित संभागीय परिवहन प्राधिकरण को होता है. मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाले इस प्राधिकरण का सचिव संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO) होता है.

बीते 20 अगस्त को मंडलायुक्त राजन शुक्ल ने प्राधिकरण की एक बैठक कर आदेश पारित कर दिया जिसके अनुसार भारी वाहनों को परमिट जारी करने की व्यवस्था ही बदल दी गयी. नयी व्यवस्था के अनुसार RTO की संस्तुति और आख्या के बाद परमिट जारी करने का अधिकार अपर मंडलायुक्त को दे दिया गया. यह आदेश जारी होते ही हडकंप मच गया. इसकी वजह थी कि मोटर यान नियमावली के अनुसार यह अधिकार परिवहन विभाग से जुड़े किसी अधिकारी के पास ही हो सकता है.

20 अगस्त को जारी इस आदेश के बाद अपर आयुक्त ने इसे विधि सम्मत न होने के कारण कार्यभार लेने से मना कर दिया नतीजतन भारी वाहनों को परमिट जारी होने ही बंद हो गए. इसके बाद संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में भी रोष बढ़ गया.

मामला जब तूल पकड़ने लगा तब आनन् फानन में फिर बैठक बुलाई गयी और आदेश को बदला गया. लेकिन इस दौरान भारी वाहनों के परमिट को ले कर मंडलायुक्त की तेजी पर भी सवाल उठने लगे. सवाल यह भी उठे कि आखिर ऐसी क्या समस्या आ गयी थी कि मंडलायुक्त ने नियमावली को ही धता बताते हुए एक ऐसा आदेश पारित कर दिया जो कि विधि सम्मत ही नहीं था.

इस बारे में जब इलाहबाद के संभागीय परिवहन अधिकारी से उनके मोबाईल न. 8005441130 पर बात करने का प्रयास किया गया तब उनका फोन ही नहीं उठा.

वर्तमान में मंडलायुक्त इलाहाबाद के पद पर कार्यरत आईएएस अधिकारी राजन शुक्ला अपनी कार्यशैली को ले कर पहले भी चर्चित रहे हैं. गोरखपुर और जौनपुर के डीएम् पद पर रहते हुए उनके कार्यशैली के चर्चे इतने बढ़ गए थे कि लम्बे समय तक वे फिल्ड पोस्टिंग से अलग रखे गए. लगभग 13 वर्ष बाद फिर से पा कर इलाहाबाद पहुचे मगर अब वहां भी उनके कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं.

Tags:    
loading...
loading...

  Similar Posts

Share it
Top