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13 साल पहले की मुखबिरी का बदला तो नहीं है ब्रजपाल तेवतिया पर हमला !

 Tahlka News |  2016-08-12 08:37:30.0

13 साल पहले की मुखबिरी का बदला तो नहीं है ब्रजपाल तेवतिया पर हमला !
तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. गाजियाबाद के भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर सरेशाम हुए हमले ने एक बार फिर पश्चिमी यूपी के माफिया जगत को चर्चा में ला दिया है. तेवतिया पर जिस तरह अत्याधुनिक हथियारों से हमला किया गया वह इस बात का सबूत है कि हमलावर पूरी तरह से तैयार हो कर आये थे और वो तेवतिया को कतई जिन्दा नहीं छोड़ना चाहते थे.

खास बात यह है कि इस पूरे मामले में यूपी पुलिस के सिपाहियों का बड़ा रिश्ता रहा है. तेवतिया भी यूपी पुलिस का सिपाही रहा है और उस पर कांस्टेबल सुरेश दीवान  की हत्या का मुक़दमा भी चला . घटना के बाद हिरासत में ली गयी सुनीता भी यूपी पुलिस में कांस्टेबल है.


तेवतिया का इतिहास भी बहुत पाक साफ़ नहीं रहा है. यूपी पूलिस के सिपाही रहे तेवतिया ने फर्श से उठ कर बृजपाल ने ऊपर तक अपनी पकड़ बनायीं थी. भाजपा की गाजियाबाद की राजनीती में तेवतिया की इतनी हनक थी कि माना जाता है कि गाजियाबाद से चुनाव जीते राजनाथ सिंह और जनरल वीके सिंह तक तेवतिया का हाल लेने अस्पताल पहुँच गए. घटना के तुरंत बाद ही राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह और केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा भी अस्पताल पहुँच गए थे.

बृजपाल तेवतिया आम तौर पर बुलेटप्रूफ गाडी से चलते थे मगर इस घटना के वक्त वे दूसरी गाडी में सवार थे. जाहिर है इस बात की सटीक मुखबिरी हुयी थी.
तेवतिया पर यूपी पुलिस कांस्टेबल सुरेश दीवान के मर्डर का भी आरोप रहा है. सुरेश की हत्या के बाद तेवतिया का कद बहुत तेजी से बढ़ा. धीरे धीरे उनका रसुख बढ़ता रहा. इसके बाद उनकी दुश्मनी गाजियाबाद के राकेश हसनपुरिया से हो गयी. राकेश की पत्नी भी यूपी पुलिस में कांस्टेबल है.

यह भी पढ़े  BJP नेता बृजपाल तेवतिया की हालत नाजुक, हिरासत में महिला कांस्टेबल  https://tahlkanews.com/bjp-leader-brijpal-teotia-condition-critical-one-woman-constable-in-custody/102823

साल 2003 में राकेश हसंनपुरिया की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गयी. इस मामले को फर्जी बताते हुए राकेश की पत्नी सुनीता ने पुलिस के खिलाफ मुक़दमा लिखवा दिया था. उस समय यूपी के गैंगस्टर राकेश हसनपुरिया से तेवतिया के विवाद की चर्चाएँ तेज थी. राकेश और बृजपाल दोनों की राजनितिक महत्वाकांक्षाएं तेज हो रही थी.

राकेश तब जिला पंचायत का सदस्य बन चूका था और उसपर एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे भी चल रहे थे. गाजियाबाद के थाना कविनगर और एसटीएफ ने मिलकर हिस्ट्रीशीटर राकेश हसनपुरिया को श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क के पास मार गिराया था हसनपुरिया की मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए उसकी पत्नी सुनीता ने प्रेस कांफ्रेस बुलाई थी मगर पुलिस ने उस रेस्टोरेंट को बंद करा दिया था. इसके बाद सुनीता ने रेस्टोरेंट के बाहर सीढ़ियों पर बैठकर पत्रकारों से बातचीत की थी.

राकेश हसनपुरिया की मुठभेड़ को फर्जी बताकर सुनीता ने हाई कोर्ट के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज कराई थी. लेकिन पुलिस ने उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी कि मुठभेड़ फर्जी नहीं थी.

बृजपाल पर गुरुवार को हुए हमले के तुरंत बाद पुलिस ने सुनीता को हिरासत में ले लिया. शुरूआती कयासों के अनुसार इस हमले की साजिश सुनीता ने ही राकेश के बाद उसका गैंग चलने वालो के साथ रची थी. सुनीता का मानना है कि राकेश के मुठभेड़ में हुयी हत्या के पीछे भी बृजपाल तेवतिया ही थे. उन्होंने ही पुलिस के अपने संबंधो के दम पर सटीक मुखबिरी करावा कर राकेश की हत्या करवा दी थी.

हांलाकि इस बीच तेवतिया ने जमीनों के कारोबार से बहुत पैसा बनाया था और वो विवादित जमीनों के कई मामले में भी पड़ गए थे. एक संभावना इस बात की भी है कि जमीन के सौदे में कोई बड़ी डील इस हमले का करण हो सकती है.

बृजपाल अपने खतरे को बखूबी समझते थे इसलिए उनके साथ निजी अंगरक्षकों की हथियारों से लैस एक बड़ी फ़ौज साथ रहती थी. जाहिर सी बात है कि तेवतिया का दमन पाक साफ़ नहीं है.

अब इस बड़ी घटना के बाद इस बात की भी सम्भावनाये बढ़ गयी है कि पश्चिमी यूपी में एक बार फिर गैंगवार शुरू हो जाएगा. फिलहाल तो ब्रिजपाल तेवतिया जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं.

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