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कामसूत्र से जुड़े ऐसे तथ्य जिन्हें जान लेना आपके लिए बेहद जरूरी है...

 Tahlka News |  2016-03-20 19:22:24.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 21 मार्च. कामसूत्र मुख्यरूप से मनुष्य के सेक्सुअल बिहेवियर पर आधारित वात्स्यायन द्वारा लिखित संस्कृत साहित्य है। वात्स्यायन वैदिक काल के एक हिंदू दर्शनशास्त्री थे। इनके बारे में कहा जाता है कि ये दूसरी सदी में रहे थे। फोटोः टाइम्स ऑफ एजुकेशन ‘काम’ हिंदू जीवनकाल के चार उद्देश्यों में से एक है। इसका अर्थ है लालसा। सेक्सुअल लालसा भी इसी से जुड़ी है। वस्तुतः ‘सूत्र’ का अर्थ एक डोर या फिर रेखा है जो चीजों को आपस में जोड़ती (अर्थात मनुष्य को) है। दुनिया में कामसूत्र को रचनात्मक कामुक मुद्राओं के पर्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया है लेकिन वास्तविकता में सिर्फ 20 फीसदी कामसूत्र ही कामुक मुद्राओं पर केंद्रित है। कामसूत्र सबसे प्राचीन और सबसे असाधारण हिंदू मूलग्रंथ है, जिसे आमतौर पर कामशास्त्र के नाम से भी जाना जाता है। वात्स्यायन ने कई लेखकों के किए गए कामों का तुलनात्मक अध्ययन किया और उन्हें अपने कामसूत्र में पिरोया। उन्होंने अपने काम के सात भागों को इंगित किया है जिसमें दत्तक (पहला भाग), सुवर्णनभा (द्वितीय भाग), घोतकमुख (तृतीय भाग), गोनर्दिया (चतुर्थ भाग), गोणिकपुत्र (पंचम भाग), चरण्य (छठा भाग) और कुछुमरा (सातवां भाग) है। कामसूत्र जीवन के चार उद्देश्य पर केंद्रित है जिन्हें आमतौर पर पुरुषार्थ कहते हैं। 1. धर्म जिसका अर्थ धार्मिक जीवनचर्या से है। 2. अर्थ जिसका मतलब भौतिक समृद्धि से है। 3. काम जिसका अर्थ लालसा है और 4. मोक्ष जिसका अर्थ मुक्ति से है। कई दर्शनशास्त्रियों ने कहा है कि अर्थ और काम का महत्व प्रतिदिन की जिंदगी में होता है जबकि मोक्ष का जुड़ाव जन्म और मृत्यु के चक्र से है। लेकिन कामसूत्र इसपर कहता है- धर्म अर्थ से बेहतर है और अर्थ काम से बेहतर। लेकिन जीवन के लिए एक राजा की जिंदगी में अर्थ को हमेशा पहले होना चाहिए। वहीं, काम, सार्वजिनक महिलाओं का पेशा होना चाहिए। उन्हें अन्य दो से इसे ऊपर रखना चाहिए। यह आम नियम के अपवाद हैं। कामसूत्र 1.2.1 वात्स्यायन ने अपने कामसूत्र में माना है कि हवस खतरा भी बन सकती है। महात्मा बुद्ध ने भी कामसूत्र पर उपदेश दिया था। इसे सूत्र 1 में जोड़ा गया है। वैसे भी कॉमसूत्र में कामुकता ढूंढना इंसानों के लिए थोड़ा खतरनाक भी हो सकता है। पश्चिमी दुनिया में कामसूत्र को लोग गलत तरीके से लेते हैं। कामसूत्र को वे तांत्रिक कार्यों से जोड़कर देखते हैं, जबकि ये बात पूरी तरह से गलत है। कामसूत्र के सबसे प्रचलित अंग्रेजी अनुवादित पुस्तक 1883 में छपी थी। जिसे सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टॉन ने लिखा था। हालांकि किताब में मुख्य लेखनी भारतीय पुरातत्वविद् भगवान लाल इंद्रजी ने चलाई, जो बर्टॉन के मित्र थे। इसमें शिवराम परशुराम भिड़े नाम के छात्र ने भी उन्हें सहयोग दिया।

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