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यूपी चुनाव: 200 सीटों पर सवर्ण कैंडिडेट उतारेगी कांग्रेस, 100 सीटों पर सिर्फ ब्राह्मण

 Abhishek Tripathi |  2016-08-18 03:42:15.0

congress_pk_planतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. शीला दीक्षित को सीएम कैंडिडेट बनाकर कांग्रेस ने पहले ही ब्राह्मण कार्ड खेल दिया था, लेकिन अब कांग्रेस एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। कांग्रेस के थिंक टैंक प्रशांत किशोर (पीके) की मानें तो, 100 सीटें ब्राह्मणों को, 70 सीटें राजपूतों को और 30-32 बाकी अगड़ी जातियों को दी जा सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो ये भी तय माना जा रहा है कि कांग्रेस को इसका अच्छा फायदा मिल सकता है। यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस का ये अभी तक का सबसे बड़ा दांव है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के आलाकमान नेताओं ने पीके के इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है।


पीके की रणनीति के मुताबिक, गैर पार्टी मंचों से तमाम ब्राह्मण और राजपूत सम्मलेन कराए जाएंगे। वहां कांग्रेस के नेता बतौर ब्राह्मण हिस्सा लेंगे। खासतौर पर ब्राह्मणों से कहा जायेगा कि...

अबकी बार आखिरी बार, यानी 1989 में आखिरी बार कांग्रेस की ही सरकार में एनडी तिवारी यूपी के आखिरी ब्राह्मण सीएम थे। उसके बाद बीजेपी, सपा, बसपा की सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने ब्राह्मण को सीएम नहीं बनाया। अब कांग्रेस ने हिम्मत की है। अबकी बार भी नहीं बना तो ये राज्य में किसी ब्राह्मण के सीएम बनने का मौका फिर शायद न आए।


ब्राह्मण वोट बैंक को बनाया आधार
पीके के मुताबिक, मायावती के चरणों में और मुलायम के पिछलग्गू क्यों बनना चाहते हैं। बीजेपी ने यूपी में मौका मिलने पर भी ब्राह्मण सीएम नहीं दिया, उलटे इस बार तो ब्राह्मण लक्ष्मीकांत वाजपेयी को अध्यक्ष पद से हटा दिया। ऐसे में सम्मान के लिए कांग्रेस के साथ आइए। हमने सीएम उम्मीदवार दिया और 100 से ज़्यादा सीटें भी देंगे।


राजपूत सम्मेलनों में कहा जायेगा
बीजेपी में तमाम राजपूत सांसद जीते, लेकिन राजनाथ सिंह तक के हाथ बंधे हुए हैं, उनके पर कतर दिए गए हैं। बसपा के विजय बहादुर सिंह जैसे नेताओं को बेइज़्ज़त कर निकाला गया। सपा में अमर सिंह को निकाला गया, वो आये तो वो रुतबा नहीं मिला। इसलिए सम्मान के साथ कांग्रेस में आइये, 70 से ज़्यादा सीटें भी दी जाएंगी।


रसूखदार राजपूत-ब्राह्मण परिवारों से संपर्क
जितिन प्रसाद और संजय सिंह को ज़िम्मेदारी दी गयी है कि, वो यूपी में सम्मानित और असरदार ब्राह्मण परिवारों से संपर्क करें, फिर चाहे वो राजनीती में हों या न हों। उनको ये एहसास दिलाने की कोशिश होगी कि, कांग्रेस हमेशा उनके हितों का ख्याल रखेगी।

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