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कांग्रेस का यह तीर चूकना निश्चित है : मायावती

 Sabahat Vijeta |  2016-07-15 17:21:26.0

mayawati


लखनऊ. बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विभिन्न पार्टियों में चक्कर काटने वाले राज बब्बर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष व व्योवृद्ध कांग्रेसी नेता व दिल्ली में भ्रष्टाचार के अनेक मामलों की जाँच झेल रहीं श्रीमती शीला दीक्षित को यहाँ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि इससे उत्तर प्रदेश के सर्वसमाज के लोग ख़ासकर नाराज ब्राह्मण समाज कतई प्रभावित होने वाला नहीं है.


सुश्री मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि दिल्ली में अपना ज़्यादातर राजनीतिक जीवन व पद हासिल करने वाली कांग्रेस की वयोवृद्ध नेता श्रीमती शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना वास्तव में ख़ासकर नाराज ब्राह्मण समाज की आँखों में धूल झोंकने जैसा है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी सत्ता में आना तो दूर यहाँ सत्ता में आने के करीब भी कहीं पर नहीं दिख रही है.


इसी प्रकार विभिन्न पार्टियों में चक्कर लगाने के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले राज बब्बर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाना वास्तव में प्रदेश में कांग्रेस की ख़स्ताहाल व दिवालियेपन को ही दर्शाता है. इस प्रकार की नियुक्तियों का कोई लाभ आने वाले विधानसभा आमचुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिलने वाला नहीं है.


उत्तर प्रदेश में आज नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से ख़ासकर ब्राह्मण समाज यहाँ उपेक्षा व तिरस्कार का शिकार रहा है. चाहे कांग्रेस पार्टी हो या भाजपा या फिर समाजवादी पार्टी, इन सभी पार्टियों ने ख़ासकर ब्राह्मण समाज के लोगों की लगातार उपेक्षा की. ऐसे विकट समय में बी.एस.पी. ही उत्तर प्रदेश में एक अकेली ऐसी पार्टी है जिसने अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के लोगों को पार्टी संगठन व सरकार बनने पर भी भरपूर आदर-सम्मान दिया और चुनाव मैदान में भी काफी बड़ी संख्या में उतार कर उन्हें पुनर्जीवित किया. बी.एस.पी. की ‘‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय‘‘ की नीति के अनुसार ब्राह्मण समाज के भी बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखते हुये उन्हें हर स्तर पर पूरा आदर-सम्मान व राजनीतिक लाभ प्रदान किया, और आज के समय में जबकि उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण समाज आदर-सम्मान हेतु दूसरी पार्टियों से कहीं ज़्यादा बी.एस.पी. नेतृत्व पर भरोसा करता है तो ऐसे समय में कांग्रेस पार्टी द्वारा ख़ासकर वयोवृद्ध श्रीमती शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीद्वार घोषित करके आगे करना ब्राह्मण समाज की आँखों में धूल झोंकने के सिवाय और कुछ नहीं है. आज यह पूरी तरह से निश्चित है कि ख़ासकर उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के साथ-साथ ब्राह्मण समाज का भी हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है.


मायावती ने कहा कि यह वही शीला दीक्षित हैं जिन्होंने दिल्ली के विकास के नाम पर ख़ासकर दलितों, पिछड़ों, ग़रीबों आदि के हित व कल्याण हेतु बजट के धन को सही जगह ख़र्च नहीं करके उसे अन्य ग़ैर-जरूरी काम पर खर्च किया और साथ ही कामनवेल्थ गेम में भ्रष्टाचार के कई मामले इनके ऊपर लम्बित है. दिल्ली के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने तो अभी हाल ही में दिल्ली जल बोर्ड के टैंकर ख़रीद घोटाले मामले में उन्हें समन जारी कर पेशी पर बुलाया है. ऐसे नेतृत्व से उत्तर प्रदेश की आमजनता का क्या भला होने वाला है, यह सोचने वाली बात है.


कुल मिलाकर राज बब्बर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष व श्रीमती शीला दीक्षित को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीद्वार घोषित करके जो अंधेरे में तीर चलाया है उसका चूकना निश्चित है.

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