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'तेजस' के जनक हैं IIT BHU के हरिनारायण, कहा था- 'तेजी से बढ़ता हुआ बच्चा है'

 Abhishek Tripathi |  2016-07-02 07:39:49.0

Kota_Harinarayanaतहलका न्यूज ब्यूरो
वाराणसी. 'तेजस' सुपरसोनिक फाइटर जेट को इंडियन एयर फोर्स में शामिल कर लिया गया है। तेजस पर पूरे भारत को गर्व है, लेकिन शायद ही ये बात कोई जानता होगा कि इस हल्के फाइटर प्लेन के जनक पद्मश्री कोटा हरिनारायण आईटी बीएचयू के मेकैनिकल इंजीनियरिंग विभाग से स्नातक हैं।


अब्दुल कलाम के साथ कर चुके हैं काम
कोटा हरिनारायण इस साल 16 जनवरी को आईआईटी बीएचयू में आए थे। यहां उन्होंने कहा था कि 'तेजस' तेजी से बढ़ता हुआ बच्चा है। मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के निर्देशन में काम कर चुके हरिनारायण का कहना है कि इससे भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।


4 जनवरी 2011 को भरी थी पहली उड़ान
डॉ. हरिनारायण का कहना है कि यह नौसेना के जहाज से उड़ान भरने के साथ ही लैंडिंग भी कर सकता है। कोटा ने उन दिनों को याद किया था, जब वह और उनके सहयोगी दिनरात एक करके तेजस को डिजाइन कर रहे थे। तभी परमाणु परीक्षण के कारण अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए। उन्होंने बताया कि तब हमने नए सिरे से पूरी तरह भारतीय तकनीकी पर आधारित हल्के लड़ाकू विमान को तैयार किया। तेजस ने अपनी पहली उड़ान चार जनवरी 2001 में भरी और तब से लगातार सफलता हासिल करता चला गया।


55 हजार करोड़ है 'तेजस' की लागत
12 टन वजनी इस विमान की जब शुरुआत की गई थी तब लागत 560 करोड़ बताई गई थी लेकिन आज बढ़ते बढ़ते 55 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। जनवरी 2001 में पहली प्रोटोटाइप एलसीए ने उड़ान भरी और तब से लेकर आज तक 3000 घंटे से ज्यादा ये उड़ान भर चुका है और अभी तक इसका रिकार्ड अव्वल है। दिसंबर 2013 में इसको इन्सियल ऑपरेशनल क्लियरेन्स मिल चुका है और इस साल के अंत तक फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेन्स भी मिल जाएगा। इसका मतलब ये है कि एफओसी मिलने के बाद ये लड़ने के लिए तैयार हो जाएगा।

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