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युवा DM, कहीं लिफ्ट मांगकर तो कहीं कॉफ़ी पीकर निपटा रहे हैं जनता की समस्या

 Sabahat Vijeta |  2016-05-31 14:19:26.0


  • उत्तर प्रदेश में युवा नौकरशाह लिख रहे हैं बदलाव की पटकथा


ashutosh niranjonमोहित दुबे  
लखनऊ| युवा 'कलक्टर साहब' एक चौपाल पर ग्रामीणों के साथ गरम कॉफी पी रहे हैं और लइया-चना फांक रहे हैं। एक युवा महिला आईएएस अधिकारी आंगनबाड़ी केन्द्र पर एक शिशु को गोद में खेला रही हैं। एक जिलाधिकारी एक मोटरसाइकिल के पीछे बैठकर वाराणसी के एक गांव में यह देखने जाते दिखते हैं कि खुले में कहां शौच किया जा रहा है।


उत्तर प्रदेश में यह धारणा गलत साबित हो रही है कि नौकरशाह केवल दफ्तर में आराम करने के लिए होते हैं। प्रदेश में युवा अधिकारियों की टीम एक नया अध्याय लिख रही है, जिससे न केवल लोगों को लाभ हो रहा है बल्कि लंबे समय से बदलाव की बाट जोह रही राज्य की बिगड़ी हुई नौकरशाही भी बदल रही है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैसे 'चाय पर चर्चा' अभियान को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक सफलता के लिए इस्तेमाल किया, शायद गोंडा के जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने उसी से प्रेरित होकर 'कॉफी विद कलक्टर' कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें वह जिले के किसी भी ग्राम पंचायत को चुन लेते हैं और अपने अधिकारियों के साथ कॉफी पीने पहुंच जाते हैं। वहीं गांव वालों की समस्याएं सुनी जाती है और तत्काल उनकी समस्याओं का निपटारा कर दिया जाता है।


raj shekharइसका पहला आयोजन हाल में पारसपुर प्रखंड की मिझौरा पंचायत में हुआ। गरम कॉफी के साथ ग्राम प्रधान विपिन कुमार सिंह, लेखपाल और पंचायत सचिव ने सड़क से लेकर बिजली आपूर्ति, पानी एवं कई मुद्दों पर चर्चा की।


यह भी तय किया गया कि ग्राम प्रधान बहुत जल्द इसी तरह लेखपाल, पंचायत सचिव, बीट के सिपाही और अन्य निचले स्तर के कर्मियों के साथ दोपहर के खाने पर बैठक करेंगे। निरंजन ने आईएएनएस से कहा, "इसके पीछे पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने और भूमि विवाद जैसे बहुत सारे मुद्दों को निचले स्तर पर ही निपटा देने का विचार है।"


वाराणसी के जिलाधिकारी विजय करण आनंद भी इसी तरह का उदाहरण पेश कर रहे हैं। कई बार वह दूर दराज के इलाके में मोटरसाइकिल के पीछे बैठ कर वास्तविक स्थिति देखने के लिए पहुंच जाते हैं। हाल में वह सुबह पांच बजे एक मोटरसाइकिल के पीछे बैठकर स्वच्छता, बिजली एवं नाले की वास्तविक स्थिति देखने निकल पड़े थे।


उन्होंने दयानगर मलिन बस्ती और सिगरा की दयनीय हालत देखी और तत्काल स्थिति में सुधार करने का आदेश दिया। वह लोगों को यह समझाने के लिए सुबह-सुबह गांवों में भी पहुंच जाते हैं कि खुले में शौच न करें।


Kinjal-Singhमुरादाबाद के जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने गांवों में विकास के कुछ कामों में नजीर पेश की है। उन्होंने एक मोबाइल एप विकसित करने में मदद की जिससे लोहिया ग्राम के कामों पर निगरानी रखी जा सके। लोहिया ग्राम गरीबों के लिए कम लागत में आवास बनाने की योजना है।


फैजाबाद की जिलाधिकारी किंजल सिंह को उनके लखीमपुर खीरी में किए गए अच्छे कामों के लिए आज भी याद किया जाता है। उन्होंने स्कूली बच्चों के दोपहर के भोज के लिए विशेष शेड बनवाए थे। थारू जनजाति के लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए कई कदम उठाए थे।


पीलीभीत के जिलाधिकारी मासूम अली असगर ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को एक तरह से अतिक्रमण मुक्त करा दिया है। उन्हें यहां के बाघ संरक्षण क्षेत्र के सौंदर्यीकरण का श्रेय भी दिया जाता है।


आजमगढ़ के जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के इस संसदीय क्षेत्र में शहर को सुंदर बनाने का अद्भुत काम किया है। लखनऊ के जिलाधिकारी राज शेखर भी एक नई लहर पैदा कर रहे हैं। वह होटलों को बाल श्रमिकों से मुक्त कराने के अलावा करीब एक हजार एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा चुके हैं।

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