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काशी में नारियल के खोपरे से होगा दाह-संस्कार, हर साल बचेंगे 5 लाख पेड़

 Anurag Tiwari |  2016-07-13 10:06:05.0

Coconuts, Coimbatore, Nithyanandam, Varanasi, Cremation, Trees, Environment, Deforestationअनुराग तिवारी

वाराणसी। जल्द ही धर्मनगरी काशी में अंतिम संस्कार के लिए नारियल के खोपरों से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाएगी। इससे न केवल प्रसाद में नारियल चढ़ाने के बाद होने वाले कूड़े से निजात मिलेगी बल्कि हर साल 5 लाख पेड़ों का जीवन भी बचाया जा सकेगा।

कोयम्बतूर की संस्था ने की पहल

कोयम्बतूर की एक संस्था ने पर्यावरण बचाने की पहल की है। इसके लिए उसने काशी पसुमई यात्रा नाम से अभियान शुरू किया है। सोमवार को इस यात्रा की शुरुआत हुई, इस अभियान के सदस्य वाराणसी के लिए रवाना हुए।


[caption id="attachment_95270" align="aligncenter" width="720"]Coconuts, Coimbatore, Nithyanandam, Varanasi, Cremation, Trees, Environment, Deforestation काशी पसुमई यात्रा की शुरुआत पर आयोजित हुआ कार्यक्रम[/caption]

दाह संस्कार के लिए हर साल 5 लाख पेड़ों की जरुरत

इस अभियान की शुरुआत करने वाले एन नित्यानंदम ने बताया कि इस प्रक्रिया में लगभग 35 लाख रुपयों का खर्च आया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत से पहले उनकी संस्था के 14 सदस्यों ने 12 बार वाराणसी का दौरा किया। इन लोगों ने वाराणसी के घतोंव्पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का अध्यान किया और पाया कि हर साल दाह संस्कार के लकड़ियों के लिए आस पास के इलाके में 5 लाख पेड़ काट दिए जाते हैं। इन पेड़ों को नारिया के खोपरों को इस्तेमाल कर बचाया जा सकता।

50 किग्रा नारियल का खोपरा करेगा 350 किग्रा लकड़ी का काम

नित्यानंदम ने बताया कि उनकी टीम ने अपने अध्ययन में पाया कि औसतन हर रोज 400 शव गंगा के घाटों पर जलाए जाते हैं। एक शव को जलाने में लगभग 350 किलोग्राम लकड़ी का प्रयोग होता है। इस तरह से हर रोज वाराणसी के घाटों पर लगभग 240 टन लकड़ी जलाई जाती है। यदि शव जलाने के लिए नारियल के खोपरों का प्रयोग हो तो हर शव को जलाने के लिए मात्र 50 किग्रा नारियल के खोपरों की जरूरत होगी। अंदाजा लगना मुश्किल नहीं है कि इससे कितनी बाहरी मात्रा में लकड़ी और पेड़ों की बचत होगी।

पहली खेप में आएगा 140 टन नारियल के खोपरे का पाउडर

नित्यानंदम ने बताया कि इस अभियान के तहत पहली खेप में 140 टन नारियल के खोपरे का पाउडर वाराणसी भेजा जा रहा है, इससे 2800 शव जलाए जा सकेंगे। इस प्रक्रिया में लगभग 840 टन लकड़ी और 2400 पेड़ों को कटने से बचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सम्बंधित विभागों से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिलने के बाद जल्द ही 8 ट्रकों में नारियक के खोपरों का पाउडर वाराणसी भेजा जाएगा।

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