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रामगंगा और काली को साफ़ किये बगैर गंगा साफ़ नहीं होगी

 Sabahat Vijeta |  2016-03-25 13:09:58.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


gangaलखनऊ, 25 मार्च. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताज़ा रिपोर्ट यह बताती है कि रामगंगा के पानी में मानक से ज्यादा एसिड है और कन्नौज की काली नदी में आक्सीजन की कमी है. इन दोनों नदियों के हालात ठीक किये बगैर गंगा को निखारना संभव नहीं है.


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रामगंगा और काली नदी के बारे में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट माँगी तो इस बात का खुलासा हुआ. यह दोनों नदियाँ उत्तराखण्ड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कचरा बहाकर ले आती हैं और उसे गंगा में मिला देती हैं. पहले यही दोनों नदियाँ गंगा को जल के रूप में जीवन देती थीं लेकिन यही अब गंगा को बर्बाद करने का कारण बन गई हैं.


इन नदियों में घरेलू कचरे के अलावा शुगर मिल, पेपर मिल और शराब कारखानों का वेस्ट मैटीरियल भी गिरा दिया जाता है. गंगा एक्टिविस्ट रामजी त्रिपाठी की बात मानें तो गंगा नदी में सबसे ज्यादा 7 हज़ार क्यूसेक गंदगी काली नदी से आती है. यूपी के अलीगढ़, एटा और बुलंदशहर में तो नदी का पानी सडन की स्थिति तक पहुँच चुका है.


रामजी त्रिपाठी ने सलाह दी है कि कानपुर जैसे बड़े शहरों में अगर नदी में गिरने वाली गन्दगी को बड़े पाइप के ज़रिये नदी के पास बालू में खुदाई कर बनाए गए टैंकरों में गिरा दिया जाए तो एक तरफ नदी प्रदूषित होने से बच जायेगी दूसरी तरफ 20 फीसदी पानी अपने आप साफ़ होकर नदी में मिलाने लायक हो जाएगा. बाकी बचे 80 फीसदी पानी एसटीपी के ज़रिये साफ़ कर सिंचाई के लायक बनाया जा सकता है.

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