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नहाय-खाय के साथ आज से छठ पूजा शुरू, जानिए कैसे मनाया जाता है यह महापर्व

 Abhishek Tripathi |  2016-11-04 05:37:05.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: 
चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत आज नहाय-खाय से शुरू हो गया है। कल पांच नवंबर को खरना तथा छह नवंबर को व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को और पर्व के अंतिम दिन सात नवंबर को उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देंगे। पहले दिन की पूजा के बाद से नमक का त्याग कर दिया जाता है। छठ के दूसरे दिन को खरना के रूप में मनाया जाता है, इस दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रती खीर का प्रसाद तैयार करती है। छठ महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान भास्कर (सूर्य देव) को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। ऋग्वैदिक काल से सूर्योपासना होती आ रही है।


छठ पर्व पर महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन कहा जाता है। चार दिन के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। सूर्योपासना का यह चार दिवसीय महापर्व नहाए-खाए से शुरू होता है। अगले दिन व्रती दिनभर उपवास में रहकर गोधुली वेला में खरना करते हैं। उसके अगले दिन अस्ताचलगामी सूर्य और फिर अगली सुबह उगते सूरज को अर्घ्य प्रदान करने के साथ यह महापर्व संपन्न होता है। चार दिवसीय छठ पर्व का प्रारम्भ कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को और समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी को होता है।


गन्‍ने के रस से बनती है खीर
खीर गन्ने के रस की बनी होती है, इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता। शाम के वक्त इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद फिर निर्जल व्रत कि शुरुआत होती है। छठ के तीसरे दिन शाम के वक्त डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। साथ में विशेष प्रकार का पकवान 'ठेकुवा' और मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है। छठ के चौथे और आखिरी दिन उगते सूर्य की पूजा होती है। सूर्य को इस दिन अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।


जानिए छठ का महत्‍व






  • कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष विधान है।

  • कार्तिक मास में सूर्य नीच राशि में होता है अतः सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है, ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान ना करें।

  • षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है अतः सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाते है।

  • इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाये रख सकते हैं।


हिन्दू धर्म के पंच देवों में से एक सूर्य देव की पूजा से ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजा करने से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। सूर्य की पूजा मनुष्य को निडर और बलवान बनाती है। इससे अंहकार, क्रोध, लोभ, इच्छा, कपट और बुरे विचारों का नाश होता है। मानव परोपकारी स्वभाव का बनता है तथा आचरण कोमल और पवित्र होता है।

सूर्यदेव की आराधना के लिए इन मंत्रों का भी जाप करें :


नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवीकरं रविं भानुं मार्तण्ड भास्करं भगम्।।

इन्दं विष्णु हरिं हंसमर्क लोकगुरूं विभुम्।

त्रिनेत्रं र्त्यक्षरं र्त्यडंग त्रिमूर्ति त्रिगति शुभम्।।

क्‍यों दिया जाता है अर्घ्‍य







छठ पर्व सूर्य की आराधना का पर्व है और कहा जाता है कि सूर्य की शक्तियों का मुख्य स्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। इसलिए छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की भी संयुक्त आराधना होती है। सुबह के समय यानि चौथे दिन सूर्य की पहली किरण यानि ऊषा और शाम के समय यानि तीसरे दिन सूर्य की अंतिम किरण यानि प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

कैसे मनाएं नहाए-खाय 





छठ के पहले दिन को जिसे ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बना लिया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से शाकाहारी भोजन बनाती है। छठव्रती भोजन का एक छोटा हिस्सा सूर्य को समर्पित करती है। इसके बाद खुद उस भोजन का ग्रहण करती है बाद में परिवाद के सदस्य उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। भोजन पकाने के लिए चावल, कद्दू, चने की दाल, घी और सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। भोजन बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे का ही प्रयोग किया जाता है। भोजन पकाते समय सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सूर्य की पूजा के लिए सुबह स्नान कर सफेद वस्त्र पहनें और सूर्य देव को नमस्कार करें। फिर, तांबे के बर्तन में ताजा पानी भरें तथा नवग्रह मंदिर में जाकर सूर्य देव को लाल चंदन का लेप, कुकुंम, चमेली और कनेर के फूल अर्पित करें। सूर्य की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्जवलित करें। मन में सफलता और यश की कामना करें तथा “ऊं सूर्याय नम:” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाए। इसके बाद जमीन पर माथा टेककर मंत्र का जाप करें।



छठ व्रत के लाभ



  • जिन लोगों को संतान न हो रही हो या संतान होकर बार बार-समाप्त हो जाती हो ऐसे लोगों को इस व्रत से लाभ होता है।

  • अगर संतान पक्ष से कष्ट हो तो भी ये व्रत लाभदायक माना जाता है।

  • अगर कुष्ठ रोग या पाचन तंत्र की गंभीर समस्या हो तो भी इस व्रत को रखना शुभ होता है।

  • जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति ख़राब हो अथवा राज्य पक्ष से समस्या हो ऐसे लोगों को भी इस व्रत को जरूर रखना चाहिए

  • ये व्रत अत्यंत सफाई और सात्विकता का प्रतीक है।

  • इसमें आवश्‍यक रूप से सफाई का ख्याल रखना चाहिए।

  • घर में अगर एक भी व्यक्ति ने छठ का उपवास रखा है तो बाकी सभी को भी सात्विकता और स्वच्छता का पालन करना पड़ेगा।

  • व्रत रखने के पूर्व अपने स्वास्थ्य की स्थितियों को जरूर देख लें।


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