Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

इंजिनियर फेडरेशन ने कहा, जुमला है सरप्लस बिजली का केंद्र का दावा

 Tahlka News |  2016-07-18 10:58:56.0

power suply symble
तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. आल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केन्द्र सरकार व् राज्य सरकारों के सबको 24 घण्टे बिजली आपूर्ति के दावे पर सवाल उठाते हुए निजी क्षेत्र पर अति निर्भरता की ऊर्जा नीति पर पुनर्विचार और बदलाव की माँग की है । फेडरेशन ने केन्द्रीय ऊर्जा मन्त्री श्री पीयूष गोयल के देश में बिजली सरप्लस होने के दावे को भी भ्रामक करार देते हुए कहा है कि आज भी 30 करोड़ लोगों के पास बिजली कनेक्शन ही नहीं है जो दुनिया के किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ी संख्या है ऐसे में सरप्लस बिजली और सबको बिजली मुहैय्या कराने के तमाम दावे सच्चाई से परे हैं ।


shailendra-dubey-765x510फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि केन्द्रीय विद्युत् मंत्रालय का यह कहना पूरी तरह गलत है कि 2015-16 के अन्त तक देश बिजली के मामले में सरप्लस हो जायेगा । उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्युत् प्राधिकरण की मई 2016 की रिपोर्ट के अनुसार अभी लगभग 8 करोड़ घर बिजली की पहुँच से दूर हैं जिनमे 6 करोड़ से अधिक ग्रामीण क्षेत्र के घर हैं । उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार उप्र के 71% ग्रामीण और 19 % शहरी घरों तक अभी बिजली नहीं पहुंची है । बिहार के 87% ग्रामीण और 33% शहरी , झारखण्ड के 12% शहरी और 63% ग्रामीण, मध्य प्रदेश के 07% शहरी और 43% ग्रामीण, असम के 16% शहरी और 66% ग्रामीण तथा ओडिशा के 17% शहरी और 52% प्रतिशत ग्रामीण घर बिना बिजली कनेक्शन के हैं । कई अन्य प्रान्तों का हाल कमोबेश ऐसा ही है ।ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकारों का यह कहना कि देश बिजली के मामले में सरप्लस हो गया है और इसी आधार पर सबको 24 घण्टे बिजली देने का किया जा रहा दावा पूरी तरह भ्रामक है ।

उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र, हरयाणा ,पँजाब जैसे कुछ राज्यों ने निजी घरानों के साथ जरूरत से अधिक बिजली क्रय करार कर लिए हैं जिसके परिणाम स्वरुप इन प्रान्तों में बिजली सरप्लस हो गयी है और निजी घरानों को लाभ देने के लिए इन प्रान्तों में इसी कारण सरकारी क्षेत्र के बिजली घर बन्द किये जाते हैं जबकि उप्र और बिहार जैसे प्रांतों में बिजली कटौती हो रही है तो यह पूरी तरह ऊर्जा नीति की विफलता है जिस पर पुनर्विचार कर आम उपभोक्ता की जरूरत के हिसाब से ऊर्जा नीति में बदलाव किया जाना चाहिए ।

उन्होने कहा कि यह सही है कि 2012-13 में देश में 8.7% बिजली की कमी थी जो 2015-16 में 2.1% रह जायेगी किन्तु यह आंकड़े केवल उन घरों के आधार पर निकाले गए हैं जिनके पास बिजली कनेक्शन है जबकि देश के एक चौथाई लोग अभी भी बिना बिजली कनेक्शन के हैं अतः पहली प्राथमिकता इन घरों तक बिजली पहुँचाना होना चाहिए तभी बिजली की माँग और उपलब्धता का वास्तविक अन्तर पता चलेगा ।

फेडरेशन की यह माँग भी है कि निजी घरानों के साथ बिजली खरीद के 25-25 साल के लिए किये गए करारों के पुनरीक्षण का अधिकार बिजली वितरण कम्पनियों को दिया जाना चाहिए जिससे राज्य यह महँगी बिजली सरेंडर कर पॉवर एक्सचेंज या अन्य राज्य से मिल रही सस्ती बिजली खरीद सकें और उन्हें पी पी ए के तहत निजी कम्पनियों को फिक्स चार्ज न देना पड़े । उल्लेखनीय है कि पी पी ए के तहत काफी महँगी बिजली खरीद कर बिजली वितरण कम्पनियों को काफी सस्ते दाम पर यह बिजली घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं को देनी पड़ती है जिसमे औसतन 4 रु प्रति यूनिट तक की क्षति होती है ।इस कारण आर्थिक रूप से दिवालिया हो रही बिजली वितरण कम्पनियां कई बार बाज़ार में सस्ती बिजली उपलब्ध होते हुए भी उसे खरीदने में सक्षम नही रहतीं ।

उन्होंने कहा कि यदि सबको 24 घन्टे बिजली उपलब्ध कराना है तो ऊर्जा नीति में व्यापक परिवर्तन किया जाना जरूरी है अन्यथा देश में सरप्लस बिजली और सबको बिजली भी राजनीतिक " जुमला " बनकर रह जायेगा ।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top