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नेहरु के फूलपुर से मिशन यूपी की शुरुआत करेगी भाजपा

 Tahlka News |  2016-05-22 11:02:49.0

उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. असम में सरकार बनाने के बाद भाजपा ने अब अपनी निगाहे उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावो की तरफ लगा दी है. यूपी में 265+ की घोषणा के बाद अब भाजपा के मिशन यूपी की शुरुआत उस फूलपुर से होगी जहाँ से कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू संसद का चुनाव लड़ा करते थे.

BJP logoआने वाली 31 मई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इलाहबाद आ रहे हैं.ब्जापा की राष्ट्रया कार्यसमिति की जून में होने वाली बैठक भी यही होंगी. इलाहाबाद पार्टी के राज्य इकाई के अध्यक्ष केशव मौर्या का गृह जनपद है और फिलहाल वे फूलपुर से ही संसद भी हैं.


शनिवार को पार्टी के प्रदेश संगठन की बैठक में केशव मौर्या ने स्पष्ट कर दिया था कि यूपी का चुनाव पार्टी असम माडल पर ही लड़ेगी. इसके तहत बहुत जल्द पार्टी अपने सीएम पद के चेहरे की घोषणा भी करेगी. केशव मौर्य ने कहा था कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, इस पर केंद्रीय नेतृत्व बहुत जल्द फैसला लेगा.

अब भाजपा ने यूपी में विकास सप्ताह को पर्व के रूप में मानने जा रही है. इस दौरान हर जगह मोदी सरकार की उपलब्धियों को उत्तर प्रदेश में आम आदमी तक पहुंचाने के लिए 26 से 31 मई तक कार्यक्रम होंगे. इसका आगाज खुद नरेन्द्र मोदी सहारनपुर से करेंगे तो वहीँ अमित शाह 31 मई को इलाहाबाद में समापन करेंगे.

उम्मीद की जा रही है कि इलाहाबाद से ही मिशन यूपी का बिगुल फूंका जाएगा. इस बीच जबसे यह बात सामने आई है कि पार्टी यूपी में सीएम के चेहरे के साथ चुनाव लडेगी, संभावित प्रत्याशियों ने अपनी लाबिंग तेज कर दी है. हालांकि, सीएम प्रत्याशी के तौर पर बीजेपी में कई नामों पर काफी समय से चर्चा होती रही है. बीजेपी में जो नाम सीएम पद के लिए उछाले जा रहे हैं उनमें स्मृति ईरानी का नाम काफी प्रमुख है. लेकिन विश्वविद्यालयों के छात्रो में स्मृति को ले कर बहुत गुस्सा है यह बात पार्टी के खिलाफ भी जाने का खतरा है.

हैदराबाद में रोहित वेमुला और फिर जेएनयू में कन्हैया प्रकरण के कारण भी युवाओं का एक बड़ा वर्ग स्मृति से नाराज है. यूपी में भी इलाहाबाद और बनारस के विश्वविद्यालयों में स्मृति के खिलाफ गुस्सा भड़का हुआ है. ऐसे में युवाओं का एक बड़ा वर्ग स्मृति का नाम सामने आने के बाद पार्टी से दूर हो सकता है.

स्मृति ईरानी का नाम आगे बढ़ाने से पहले बीजेपी नेतृत्व को उनके नाम पर स्थानीय नेताओं में सहमति बनानी होगी. स्मृति को पचाना यूपी भाजपा के योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र और डा. दिनेश शर्मा जैसे बड़े नेताओं के लिए कतई मुमकिन नहीं होगा.

इस बीच योगी समर्थकों ने भी होर्डिंगो के जरिये भाजपा को खुली धमकी दी थी जिसमे लिखा गया था कि “योगी नहीं तो वोट नहीं” . योगी के हिन्दू युवा वाहिनी के इस तरह के तेवर ही उनके खिलाफ जाते हैं.

बहरहाल , नेहरू के कर्मस्थली से अपना मिशन 265+ शुरू करने को तैयार भाजपा को सूबे में कितनी सफलता मिलती है वह तो 2017 में ही सामने आएगा मगर सूबे में सीएम के लिए चेहरा बनने के लिए लालायित उम्म्मीद्वारों को नियंत्रण में रखना फिलहाल आलाकमान के लिए बड़ी चुनौती है.

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