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असम के फार्मूले को यूपी में दोहराएगी बीजेपी

 Sabahat Vijeta |  2016-05-19 17:22:37.0

bjpशबाहत हुसैन विजेता


नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी असम की जीत को यूपी में दोहराने के लिए उसी फार्मूले का इस्तेमाल करेगी जो उसने असम में इस्तेमाल किया. मिशन-2014 को नरेन्द्र मोदी ने जिस जादुई अंदाज़ में जीता था वह उसने थोड़े ही दिन के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में खो दिया. बिहार में चुनाव हुआ तो महागठबंधन से उसे मुंह की खानी पडी. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम देखने के बाद भाजपा हाई कमान को जीत का फार्मूला मिल गया है. उसने असम में जीत हासिल करने के साथ जो फार्मूला हासिल किया अब उसी का इस्तेमाल वह उत्तर प्रदेश में करेगी.


केन्द्र में सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुज़रता है यह बात भारतीय जनता पार्टी बहुत अच्छी तरह से जानती है. लोकसभा चुनाव में सोनिया राहुल और मुलायम सिंह यादव के परिवार के अलावा सबको चारों खाने चित्त कर देने वाली भाजपा बाद में यूपी में कुछ ख़ास चमत्कार नहीं दिखा पाई. उसकी सबसे बड़ी चिंता यूपी में भी भाजपा को लाने की है जिसमें अब तक उसकी कोई रणनीति नज़र नहीं आई लेकिन आज असम की जीत को देखने के बाद भाजपा अध्यक्ष और पार्टी के रणनीतिकार अमित शाह को जैसे फार्मूला मिला गया.


दिल्ली में जीत के बाद उत्साह से लबरेज़ अमित शाह ने जिस अंदाज़ में पत्रकारों से बात की उससे यह साफ़ महसूस हुआ कि अब पार्टी यूपी में अपनी रणनीति बदलेगी. और लोकसभा में जिस तरह उसने रिकार्ड 72 सीटें जीतीं उसी तरह से विधानसभा में भी रिकार्ड बहुमत की तरफ क़दम बढ़ाना उसकी रणनीति होगी. आज जो उसने जीत का जश्न शुरू किया है उसे वह जारी रखना चाहेगी. भाजपा समझ गई है कि हर चुनाव को सिर्फ नरेन्द्र मोदी के बल पर नहीं जीता जा सकता है. असम में मिली जीत ने उसे वह फार्मूला दे दिया है जिसने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से टक्कर का रास्ता निकाल दिया है.


भाजपा दिल्ली में हारी क्योंकि वहां अरविन्द केजरीवाल की टक्कर में पार्टी ने जो चेहरा दिया था वह नरेन्द्र मोदी का चेहरा था जबकि दिल्ली की जनता को मुख्यमंत्री का चेहरा चाहिए था. बिहार में महागठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार थे तो भाजपा के पास फिर से मोदी के सिवाय कोई चेहरा नहीं था. असम में उसने सबसे पसंदीदा चेहरे सर्वानन्द सोनोवाल को बतौर मुख्यमंत्री पेश किया और उसका शानदार नतीजा सामने आ गया. इस नतीजे को देखने के बाद भाजपा ने समझ लिया कि यूपी के मिशन-2017 को जीतने के लिए उस चेहरे की ज़रुरत है जो अखिलेश यादव और मायावती का मुकाबला कर सके. चेहरा भी ऐसा हो जो यूपी के जातीय समीकरण को समझता हो. वह चेहरा जो सबको साथ लेकर चलने की कुव्वत रखता हो. ऐसा चेहरा होना चाहिए जिसके रहते पार्टी में गुटबाजी न हो सके. वह सर्वमान्य हो और उसकी एक आवाज़ में पार्टी उठ खड़ी हो.


भाजपा ने अब अपना एक सूत्रीय कार्यक्रम तय कर लिया है कि यूपी के विधानसभा चुनाव से बहुत पहले ऐसे चेहरे पर मुख्यमंत्री के रूप में दांव लगाएगी. जो कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह जैसी पकड़ रखता हो. जिसकी बात को टालने की हिम्मत किसी के पास न हो. जिसके नाम पर वोट भी आ सकें और जिस पर जनता भी आँख बंद कर भरोसा कर सके. भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री बहुत जल्दी ऐसे चेहरे को तलाशेंगे जो यूपी में अखिलेश यादव और मायावती के क़द का होगा और जिसके चेहरे को आगे रखकर भाजपा की चुनावी तैयारियां शुरू होंगी.

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