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भाजपा नेताओं ने “बेटी का सम्मान अभियान” को लगाया पलीता

 Tahlka News |  2016-08-05 07:08:53.0

भाजपा नेताओं ने “बेटी का सम्मान अभियान” को लगाया पलीता
उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने जब बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए वेश्या का उदहारण इतेमाल किया था तब पार्टी सकते में आ गयी थी और आनन फानन में उन्हें पद से हटा दिया गया था. मगर दुसरे दिन बसपा नेताओं ने जब दयाशंकर सिंह की बेटी और बहन के बारे में गलत टिप्पणिया की तो उत्साह में आई भाजपा ने “बेटी के सम्मान में–भाजपा मैदान में” के नारे के साथ आन्दोलन छेड़ दिया था. जगह जगह धरने हुए. मगर इसके बाद खुद भाजपा नेताओं की फिसलती जुबान ने इस अभियान को पलीता लगा दिया है.


अपने नेताओं की जुबान से पहले भी भाजपा परेशांन रही है. साक्षी महाराज से ले कर योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं ने समय समय पर ऐसे बयांन दिए हैं जिसकी आलोचना हुयी. मगर ताजा प्रकरण के बाद तो राजनीती के बदजुबानी के स्तर पर एक बहस ही छिड़ गयी थी.

लेकिन इसी बीच बदजुबानी कर सुर्ख़ियों में आने का चालान भी निकल पड़ा है. समाजवादी पार्टी के कई नेताओं की पहले भी महिलाओं के बारे में उनकी अपमानजनक टिप्पणियों के लिए आलोचना हुयी है मगर “चाल चेहरा और चरित्र” में खुद को अलग बताने वाली भाजपा के नेताओं ने बाकी दलों को काफी पीछे छोड़ दिया है.

बुलंदशहर रेप काण्ड के बाद जब काबिना मंत्री आजम खान ने इसे राजनितिक शाजिस बताने का आश्चर्यजनक बयान दिया तो यूपी भाजपा के प्रवक्ता इंद्र पाल सिंह ने भी सीमायें तोड़ दी. इंद्र पाल सिंह ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी प्रतिक्रिया में आजम खान की बेटी और पत्नी को इस मामले में लपेट लिया. इंद्र पाल सिंह ने लिखा – आजम खान की बेटी और पत्नी के साथ भी यदि ऐसा हो जाए तब पता लगेगा.

यह उसी बयान की पुनरावृत्ति थी जो बसपा नेताओं ने दयाशंकर सिंह के बारे में की थी. इंद्र पाल सिंह ने इसे अपना आक्रोश बताया मगर दरअसल यह नेताओं के उसी प्रवित्ति का हिस्सा थी जिसमे एक विवादस्पद बयान के जरिये खुद को चर्चा में लाने की कोशिश की जाती है. इंद्र पाल को एक दिन चर्चा तो जरूर मिली मगर उन्होंने पार्टी की छवि बिगड़ने में भी अपना योगदान दे दिया. साथ ही कुछ दिन पहले ही बेटी के सम्मान का नारा देने वाली भाजपा का यह अभियान भी आलोचनाओं का शिकार हो गया.

दयाशंकर सिंह के बयान के बाद तो पार्टी ने उन पर कार्यवाही कर एक संकेत तो दिया था मगर इंद्र पाल सिंह पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की. इस मामले में बहस के दौरान भी इंद्र पाल सिंह आजम खान के लिए बार बार मियाँ शब्द का प्रयोग करते हुए इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने में जुटे रहे.

अभी यह मामला थमा ही नहीं था कि बसपा छोड़ कर बागी तेवर अपनाये हुए और अब भाजपा में जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या ने कांग्रेस नेता शीला दीक्षित को “रिजेक्टेड माल” बता दिया. स्वामी प्रसाद मौर्या की यह टिप्पणी भी “बेटी के सम्मान” के खिलाफ थी.

वैसे भी माना जा रहा था कि भाजपा का यह अभियान असल में दयाशंकर सिंह से लगे झटके से निकलने की एक तात्कालिक कवायद थी मगर पार्टी प्रवक्ता और फिर संभावित नेता के बयानों ने इस अभियान के प्रति पार्टी नेताओं की निष्ठां का खुलासा तो कर ही दिया.

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