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कुंठाग्रस्त भाजपा हिंसा पर उतारू : सपा

 Sabahat Vijeta |  2016-08-26 18:38:03.0

rajendra-chaudhary
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) ने शुक्रवार को कहा कि कुंठाग्रस्त भाजपा अपने मूल चरित्र के कारण हिंसा पर उतारू हो गई है, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चोरी और सीनाजोरी करने लगे हैं।


सपा ने कहा कि गुरुवार को राजधानी में केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन के दौरान जैसी अराजकता और उपद्रव की स्थिति पैदा की गई, उसे जनता और पत्रकारों ने देखा।


सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से किए जाते हैं, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो किया वह कानून को अपने हाथ में लेना था। पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर खुलेआम हमला किया गया। धारा 144 का उल्लंघन किया गया।


उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी विधानसभा के सामने प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यालय से विस्फोटक पदार्थो का इस्तेमाल हुआ था और विधान भवन पर हिंसात्मक हमला किया गया था।


चौधरी ने कहा कि भाजपा समाजवादी सरकार के विकास कार्यो से बुरी तरह चिढ़ी हुई है। अखिलेश यादव के व्यक्तित्व के सामने भाजपा नेतृत्व कहीं भी नहीं टिकता है। इसीलिए कुंठाग्रस्त भाजपा अपने मूल चरित्र के कारण हिंसा पर उतारू हो जाती है।


प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा ने प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की साजिश पहले से रच रखी थी, तभी भाजपा के प्रदेश कार्यालय के अंदर ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे बड़ी संख्या में इकट्ठे किए गए थे। वहां से पथराव किया गया।


चौधरी ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जैसी स्वयं की छवि है, उनके नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शन में यह सब तो होना ही था। भाजपा कार्यालय का असामाजिक स्थिति पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाना निंदनीय है। जिन्होंने कानून हाथ में लेकर पुलिस और आम जनता पर हमले किए, उनको किसी भी रूप में पार्टी कार्यकर्ता नहीं माना जा सकता। ऐसे उपद्रवी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई वांछित है।


सपा प्रवक्ता ने कहा कि अपने अराजक और सांप्रदायिक कृत्य को सही बताने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को लोग अच्छी तरह पहचानते हैं। उन्हें कभी सफलता मिलने वाली नहीं है। उनका चरित्र और आचरण अब जनता की निगाहों में आ गया है।


चौधरी ने कहा कि भाजपा ने लखनऊ शहर में अशांति पैदा की और विधानसभा के अंदर संसदीय मर्यादा को तार-तार किया। इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।

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