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भाजपा कार्यसमिति की बैठक में कृषि प्रस्ताव पारित

 Sabahat Vijeta |  2016-08-07 11:27:44.0

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झांसी| उत्तर प्रदेश के झांसी में चल रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के अंतिम दिन रविवार को कृषि प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के जरिए अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बुंदेलखंड पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया गया है।


पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि उप्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी कृषि प्रस्ताव में लिए गए निर्णयों को चुनावी घोषणापत्र में भी जगह दी जाएगी। पार्टी के प्रदेश महामंत्री विद्यासागर सोनकार ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कृषि प्रस्ताव में शामिल किए गए महत्वपूर्ण मुद्दों की जानकारी दी।


सोनकर ने बताया कि बरेली से विधायक धर्मपाल सिंह ने कृषि प्रस्ताव प्रस्तुत किया और बागपत से सांसद सत्यपाल सिंह ने इसका समर्थन किया। कृषि प्रस्ताव पर हुई चर्चा में 32 लोगों ने अहम सुझाव दिया और इस पर सहमति के बाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।


उन्होंने बताया कि उप्र में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उप्र की विकास दर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पहले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उप्र से सीमेंट कारखानों को बेचा तो अखिलेश ने अपने समय में चीनी मिलों को बेचकर किसानों के साथ धोखा किया।


भाजपा के प्रदेश महासचिव ने कहा कि केंद्र सरकार ने उप्र सरकार को सब्सिडी के तौर पर 4,676 करोड़ रुपये दिए, लेकिन अखिलेश सरकार इन पैसों का हिसाब नहीं दे रही है। गांव के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 80-80 लाख रुपये प्रत्येक ग्राम पंचायत और 21 करोड़ रुपये हर ब्लॉक को देने का काम किया है।


उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 को उप्र सरकार ने किसान वर्ष घोषित किया था। जो एक छलावे की तरह है। भाजपा कार्यसमिति में पारित प्रस्ताव के जरिए बुंदेलखंड में पशु उत्थान एवं वर्णसंकर केंद्र खोलने की मांग की गई है।


प्रदेश महासचिव ने कहा कि हरियाणा की सरकार किसानों की मदद के लिए गौ-पालकों को प्रति गाय 300 रुपये और झारखंड सरकार बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त में गाय दे रही है। उप्र में यदि भाजपा की सरकार बनी तो उप्र में किसानों के लिए और अच्छी योजनाएं लाई जाएंगी।


भाजपा ने कृषि प्रस्ताव के जरिए उप्र सरकार से मांग की है कि बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा, 24 घंटे बिजली और बुंदेलखंड को दस्युमुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए।


इसके अलावा एक एकड़ जोत वाले किसानों को बीपीएल सूची में शामिल करने, आलू आधारित उद्योग लगाने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए नोडल एजेंसी नामित करने की मांग की गई।

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