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सलवा जुडुम पर भारी है राजाराम त्रिपाठी का बस्तर हर्बल मॉडल

 Sabahat Vijeta |  2016-05-03 14:25:18.0

jadeeरायपुर. छत्तीसगढ़ का आदिवासी इलाका बस्तर जड़ी-बूटियों और आर्गेनिक फार्मिंग के क्षेत्र में इतिहास बनाने जा रहा है. आदिवासी महिला कामगारों की मेहनत अब रंग लाने लगी है. बस्तर के कोंडागांव में दर्जन भर आदिवासी महिला कामगारों से घिरे राजाराम त्रिपाठी जर्मनी से आयी एक महिला को जड़ी बूटियों की खेती और आर्गेनिक फार्मिंग के गुर समझाते हैं तो उनकी आँखों की चमक देखने वाली होती है.


कृषि वैज्ञानिकों के दावों के विपरीत कोंडागांव में 12 एकड़ क्षेत्रफल में राजाराम त्रिपाठी ने काली मिर्च उगा कर लोगों को चौंका दिया है. आस्ट्रेलियन टीक के लंबे पेड़ों पर लिपटी कालीमिर्च की लताओं को दिखाते हुए वह बताते हैं कि परंपरागत रुप से लोग इसकी खेती के नाम पर केरल को ही जानते हैं पर अब बस्तर की कालीमिर्च देश ही नही विदेशों में मशहूर हो रही है.


नक्सल प्रभावित उत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में जहां सरकारें सलवा जुडुम जैसे कार्यक्रमों के जरिए आदिवासियों के पुनर्वास व उनको मुख्य धारा में लाने के प्रयासों के कारण तमाम आलोचनाओं का शिकार हैं वहीं राजाराम त्रिपाठी बड़े पैमाने पर आदिवासियों के साथ मिलकर इस दुर्गम इलाके में सोना उगा रहे हैं. कई एकड़ में फैले उनके इस संसार में प्रबंधक, सुपरवाइजर से लेकर कामगार तक आदिवासी हैं जिनमें बड़ी तादाद में महिलायें हैं. त्रिपाठी का कहना है कि इस जंगल में मसालों, जड़ी बूटियों को उगाने का श्रेय अकेले उनका नही बल्कि इन आदिवासियों का है जिन्होंने इस फार्म हाउस को अपना समझा है.


त्रिपाठी इन जड़ी बूटियों व मसालों की खेती केवल अपने व्यावसायिक हितों के लिए ही नही करते बल्कि उन्होंने बड़े पैमाने पर आदिवासियों को इसकी खेती के लिए प्रेरित भी किया है. उत्तर प्रदेश के रहने वाले राजाराम त्रिपाठी अब अपने प्रदेश में भी लोगों को मसालों की खेती सिखा रहे हैं और उन्हें बाजार दिलाने में मदद करते हैं.


hemant ji jadeeअब से 11 साल पहले 1995 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले राजाराम त्रिपाठी ने कोंडागांव शहर से दुर्गम दरभा घाटी को जाने वाले रास्ते पर देश का पहला आर्गेनिक फार्म हाउस स्थापित किया. एक दशक में आज राजाराम त्रिपाठी ने बस्तर और अन्य इलाकों के 22000 किसानों को मसालों, जड़ी बूटियों की खेती से जोड़ दिया जिनमें बड़ी तादाद आदिवासियों की है. हर्बल खेती के प्रोत्साहन एवं उन्नयन के लिए राजाराम त्रिपाठी को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया है. उन्हें एक्सपोर्ट एवार्ड के साथ ही कई अन्य संस्थाओं द्वारा पुरस्कार दिए जा चुके हैं.


jadee-2त्रिपाठी की फर्म मां दंतेश्वरी हर्बल समूह का टर्नओवर आज 10 करोड़ रुपये से भी अधिक है और उनकी मदद से देश ही नही मिडल ईस्ट, अफ्रीकी देशों में जड़ी बूटियों और मसाले की खेती होने लगी है. कोंडागांव के उनके फार्म हाउस में तैयार सफेद मूसली, स्टीविया, लेमन ग्रास की भारी मांग है. इसके अलावा राजाराम त्रिपाठी के खेतों में सफेद, पीली व लाल हल्दी की खेती भी हो रही है.


hemant-jadee-4देश के जाने माने संस्थानों आईआईटी, आईआईएम के छात्र अक्सर कोंडागांव के घने जंगलों में फैले राजाराम त्रिपाठी आर्गेनिक फार्म हाउस की केस स्टडी के लिए आते हैं.


असंभव को संभव बनाना त्रिपाठी की फितरत में है. काली मिर्च के बारे में वह बताते हैं कि धुरंधर कृषि वैज्ञानिकों ने बस्तर को इसकी खेती के लिए अनुपयुक्त बता दिया. हमने इसे एक चुनौती के तौर पर लिया और आज केरल से बेहतर कालीमिर्च की पैदावार कोंडागांव के इन खेतो में हो रही है. इसी तरह सफेद मूसली के बारे में वह बताते हैं कि कोंडागांव के उनके फार्म हाउस में पैदा होने वाली मूसली दुनिया भर में जाती है और सबसे शुद्ध है.

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