Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

बाबा बंदा बहादुर की शहादत के हुए 300 साल

 Girish Tiwari |  2016-06-17 06:10:10.0

baba-banda-singh-bahadur-shaheedi-diwas_1464782601

नई दिल्ली. महान सिख जनरल और क्रांतिकारी बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहादत के तीन सौ साल 24 जून को पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और इन क्रांतिकारी, महान दूरदर्शी व शहीद के योगदान से जनता को परिचित कराया जाएगा। बाबा बंदा सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह के आशीर्वाद से 1710 में देश के प्रथम संप्रभु राज्य का गठन किया और पूरे पंजाब में अपना अधिकार स्थापित किया। मुगलों ने उन्हें हराया और 24 जून, 1716 को उन्हें शहीद किया। उनकी शहादत के 300 वर्ष पूरे होने के मौके पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी कई सांस्कृतिक व भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन करेगी।


यह पहल इस उद्देश्य से की जा रही है कि देश की नई पीढ़ी को राष्ट्र के महान व्यक्तियों के योगदान और आजादी की लड़ाई के बारे में जागरूक किया जा सके।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की विज्ञप्ति के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक यह उत्सव जारी रहेगा, इसकी शुरुआत 17 जून को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क से तीन दिवसीय सांस्कृतिक संध्या के साथ होगी। सेंट्रल पार्क में आयोजन विशुद्ध रूप से सांस्कृतिक होंगे और ये व्यापक स्तर पर देश की सांस्कृतिक व पुरातन विविधता को प्रदर्शित करंेगे।

इसके बाद 20 जून को भारतीय डाक द्वारा पोस्टल कवर जारी किया जाएगा। 21 जून को दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी एक विशेष कार्यक्रम में स्मारक चांदी का सिक्का जारी करेगी, जिसमें केंद्रीय वित्त एवं सूचना प्रसारण मंत्री अरुण जेटली अध्यक्ष के रूप में उपस्थित होंगे।

इस मौके पर एक मैराथन 'फस्र्ट इंडिया विक्टरी रन' भी होगी जो 26 जून को इंडिया गेट के लॉन से शुरू हो कर रकाबगंज गुरुद्वारा पर समाप्त होगी। इस संपूर्ण उत्सव का समापन महीने के अंत में मेगा फिनाले के साथ होगा।

इस उत्सव आयोजन के बारे में डीएसजीएमसी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने कहा, "इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर के भुला दिए गए इतिहास पुरुषों को अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं और नई पीढ़ी को उनसे परिचित करा रहे हैं। हमारी प्रतिबद्धता है कि इतिहास में उन्हें वह स्थान दिलाया जाए जिसके वे हकदार हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारी आज की पीढ़ी का संपर्क इतिहास से लगभग खो चुका है और इस तरह के आयोजन उनके बीच जागरूकता पैदा करेंगे तथा वे अपने गौरवशाली अतीत पर नाज करेंगे।"  (आईएएनएस)|

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top