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आज़म के बयान पर राजभवन ने स्थिति स्पष्ट की

 Sabahat Vijeta |  2016-08-24 14:36:30.0

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  • केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वांछित सूचना अभी तक राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं करायी गयी

  • राजभवन को देरी का जिम्मेदार मानना तथ्यों के सर्वथा विपरीत है

  • राज्यपाल ने मुख्यमंत्री एवं विधान सभा अध्यक्ष को पत्र लिखा


लखनऊ. राजभवन ने विधान सभा के जारी वर्षाकालीन सत्र में 23 अगस्त, 2016 को हुई कार्यवाही में संसदीय कार्यमंत्री आजम खां द्वारा नगर विकास से संबंधित दो विधेयकों पर राज्यपाल द्वारा निर्णय न लिये जाने के संबंधी बयान के बारे में स्थिति स्पष्ट की है। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय को इस विषय का संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही की भी बात कही है। राजभवन ने अपने बयान में नगर विकास से संबंधित दोनों विधेयक ‘उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2015‘ तथा ‘उत्तर प्रदेश नगरपालिका विधि (संशोधन) विधेयक, 2015‘ पर राज्यपाल द्वारा कृत कार्यवाही के बारे में दिनांक सहित ब्यौरा उपलब्ध कराया है। उल्लेखनीय है कि समाचार पत्रों में विधान सभा की कार्यवाही के संबंध में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई थी।

राजभवन ने जानकारी दी कि ‘उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2015‘ तथा ‘उत्तर प्रदेश नगरपालिका विधि (संशोधन) विधेयक, 2015‘ से संबंधित पत्रावलियाँ राज्यपाल के अनुमोदन हेतु प्राप्त हुई थी। दोनों विधेयकों के प्रस्तावित प्रावधानों से केन्द्रीय कानून प्रभावित होने से पत्रावली पर राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक होने के कारण पत्रावली राष्ट्रपति के विचारार्थ 4 मई, 2016 को संदर्भित की गयी। 7 जून, 2016 को राष्ट्रपति की सचिव ने राज्यपाल को पत्र प्रेषित कर संबंधित विधेयकों की तीन-तीन प्रतियाँ गृह मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित करने का अनुरोध किया। 22 जून, 2016 को राज्यपाल द्वारा दोनों विधेयकों की तीन-तीन प्रतियाँ गृह मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित की गयी, जिसके प्राप्ति की सूचना 6 जुलाई, 2016 को राज्यपाल को प्रेषित की गयी।


राजभवन ने अपने बयान में बताया कि 8 जुलाई, 2016 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अपर सचिव ने प्रमुख सचिव राज्यपाल को पत्र प्रेषित कर अधिनियम की प्रति, अधिनियम और विधेयक के प्रावधानों की तुलनात्मक रिपोर्ट, केन्द्रीय अधिनियम के विपरीत विधेयक के प्रावधानों का विवरण प्रेषित करने को कहा तथा उसकी एक प्रति राज्य सरकार को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई। तत्पश्चात् 9 अगस्त, 2016 को राज्य सरकार ने विधेयक की पत्रावली राजभवन इस आश्वासन के साथ भेजी कि गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वांछित अधिनियम की प्रतियाँ, विधेयक के उपबन्धों पर नोट्स की प्रतियाँ, अधिनियम एवं विधेयक के प्रावधानों की तुलनात्मक रिपोर्ट तथा अधिनियम में विधेयक के माध्यम से प्रस्तावित संशोधनों को समाहित कर लिये जाने के पश्चात संशोधित अधिनियम की प्रतियाँ राज्य सरकार के प्रशासकीय विभाग से प्राप्त होते ही राज्यपाल सचिवालय को प्रेषित कर दी जायेंगी ताकि राज्यपाल सचिवालय द्वारा वांछित सामग्री एवं विधेयक पर राज्यपाल द्वारा व्यक्त आपत्ति/अभिमत की प्रतियों सहित गृह मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित कर दी जाये।


राजभवन ने यह भी बताया कि इस संबंध में अभी तक राज्य सरकार से कोई भी सूचना प्राप्त नहीं हुई है। विधेयकों से संबंधित अग्रिम कार्यवाही राज्य सरकार द्वारा की जानी है। इस स्थिति में राजभवन को देरी करने का जिम्मेदार मानना तथ्यों के सर्वथा विपरीत है।

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