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अवध यूनिवर्सिटी के कुलपति को न कोर्ट की परवाह है न कुलाधिपति की

 Sabahat Vijeta |  2016-06-20 14:08:54.0

Avadh_university_faizabadतहलका न्यूज़ ब्यूरो


फैजाबाद. राम मनोहर लोहिया अवध यूनीवर्सिटी के कुलपति डॉ. जी.सी.आर. जायसवाल अपनी मनमानियों से बाज़ आने को तैयार नहीं हैं. उन्हें न तो विश्वविद्यालय के सहयोगियों की परवाह है और न ही अदालत के आदेशों की. विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के चुनाव के लिए हाईकोर्ट ने भी आदेश दिया और कुलाधिपति ने भी लेकिन कुलपति हैं किसी की बात भी सुनने को तैयार नहीं हैं. हाईकोर्ट की बात न सुनने की वजह से कुलपति के खिलाफ वर्ष 2015 में ही अवमानना याचिका भी दायर की जा चुकी है लेकिन उन्हें उसकी भी परवाह नहीं है.


अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जी.सी.आर. जायसवाल से उनके खिलाफ आन्दोलन चलने वालों ने सार्वजनिक रूप से पांच सवाल पूछे हैं. आन्दोलनकारी जानना चाहते हैं कि




विश्वविद्यालय अधिनियम में आदेशात्मक रूप में वर्णित प्राविधानों के अनुसार विश्वविद्यालय कार्य परिषद का चुनाव क्यों नहीं कराया जा रहा है ?


विश्वविद्यालय का बजट कोर्ट द्वारा क्यों पारित नहीं कराया जा रहा है.?


किन प्राविधानों के तहत कुलपति विश्वविद्यालय के एकल खाते का संचालन कर रहे हैं ?


विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के लिए खरीदी गई पुस्तकों के बारे में जनसूचना क्यों नहीं दी जा रही है ?


और किन नियमों के तहत आरोपित और चार्जशीटेड महाविद्यालयों को फिर से परीक्षाकेंद्र बनाया जा रहा है?



आन्दोलनकारियों का आरोप है कि कुलपति लगातार धनदोहन में लगे हैं. इसी वजह से वह छात्रों, अभिभावकों और पत्रकारों से नहीं मिलते. वह अगर किसी से मुलाक़ात करते हैं तो सिर्फ प्राइवेट महाविद्यालयों के प्रबंधकों से ही मिलते हैं.


कुलपति को भेजे ओम प्रकाश और सुधीर द्विवेदी के हस्ताक्षरित इन आरोपों वाले पत्र में कहा गया है कि यह विश्वविद्यालय फैजाबाद के विद्वत समाज के लोग बाबू माता प्रसाद सिंह, पंडित वीरेश्वर द्विवेदी, शंभू नारायण सिंह और त्रिलोकी नारायण श्रीवास्तव जैसे विद्वानों की मेहनत का नतीजा है जिसे आप जैसे वेतनभोगी कुलपति अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं और आपका उद्देश्य विश्वविद्यालय से भावनात्मक लगाव नहीं सिर्फ धन कमाने से है. पत्र में यह भी कहा गया है कि चयनकर्ताओं ने तो आपको इस विश्वविद्यालय में रीडर के योग्य भी नहीं पाया था. यही वजह है कि कुलपति बनने के बाद आप बदले की भावना से काम कर रहे हैं.


आन्दोलनकारियों ने कुलपति से कहा है कि उनके पत्र में कुछ भी गलत कहा गया हो तो मानहानी का दावा कर दीजिये.

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