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आशु मालिक की कोशिश ने रोका अजित सिंह को बीजेपी के पाले में जाने से!

 Anurag Tiwari |  2016-05-29 15:43:48.0

ajit mulaym ashu

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. यूपी में होने वाले 2017 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के बीच गठबंधन हो सकता है। रविवार सुबह पहले सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव आरएलडी चीफ अजीत सिंह से मिलने उनके घर पहुंचे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों में चुनावी गठबंधन तय है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात के पीछे सूत्रधार सपा के एमएलसी आशु मालिक थे, जिन्होंने दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं को मुलकात के लिए मनाया। इससे पहले अजित सिंह बीजेपी और नीतिश कुमार के जरिए राज्यसभा जाने की जुगत में थे। आशु मालिक ने सपा सुप्रीमो और जमा मस्जिद के इमाम बुखारी की मुलाकात में अहम भूमिका निभाई थी


 

मुलायम-अजित की मुलाक़ात में सूत्रधार बने आशु मलिक!

अजित सिंह की मुलाकात यूपी में सपा के कद्दावर नेता से हुई है जिसमें दोनों के बीच समझौते का खाका तैयार हो गया बताया जाता है। देश की राजधानी दिल्ली में हुई इस मुलाकात के सूत्रधार एक बार फिर सपा प्रमुख के सबसे भरोसेमन्दों में शुमार होने वाले आशू मलिक बताए जा रहे हैं।

 

सपा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित होगा अजित सिंह का साथ आना

आशू मलिक का यह मास्टर स्ट्रोक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए संजीवनी से कम नहीं होगा। गौरतलब है कि श्री मलिक ने सपा के लिए 2012 के चुनाव के पूर्व भी राजनैतिक गणित को दुरुस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी।   बताते हैं कि समझौते पर आखिरी मुहर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा ही लगाई जानी है। सूत्र बताते हैं कि अजित की मुख्यमंत्री से भी मुलाकात हो सकती है। बताते हैं कि अजित किसी भी समझौते में अपनी व अपने पुत्र जयंत की राजनीतिक जमीन को पुख्ता करना चाहते हैं।  सूत्र बताते हैं कि दोनो दल 2017 का चुनाव साथ लडऩे पर भी सहमत हो गए हैं। बताते हैं कि अजित को राज्यसभा के साथ ही जयंत को भी एमएलसी बनाया जा सकता है। वैसे भी मुलायम  अजित के पिता चौधरी चरण सिंह के राजनैतिक शिष्य हैं। सपा प्रमुख की राजनीति पर चरण सिंह की नीतियों की गहरी छाप है।

 

बीजेपी के लिए खड़ी होंगी मुश्किलें

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह जुगलबन्दी एक नई सुरीली तान साबित हो सकती है। यह असम की जीत से उत्साहित बीजेपी के लिए यूपी में नई बाधा भी हो सकतीहै। दोनों के साथ आने से पश्चिती उत्तर प्रदेश के राजनैतिक समीकरण एक बार फिर बदल जाएंगे। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से यूपी के पश्चिमी हिस्से में जमीन बनाने में लगी सपा को रालोद का साथ 2017 के चुनाव में बडी जीत दिला सकता है



आशु की कोशिश से नर्म पड़े थे बुखारी

अभी हाल ही में विधान परिषद तथा राज्यसभा के प्रत्याशियों की  घोषणा के बाद तमतमाए दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी को जिस प्रकार से उन्होंने मुलायम से मिलवाकर शान्त कराया, उससे लगता है कि पार्टी के लिए वे फिर 2012 के पहले की भूमिका के लिए तैयार हो रहे हैं। मुलायम से मुलाकात के पूर्व सपा से दो दो हाथ का मूड बनाए बुखारी मुलाकात के बाद काफी नर्म नजर आए और उन्होंने सरकार के कामों से संतुष्टि भी जताई ,साथ ही उन्होंने आगे के कार्यक्रम भी रद्द कर सपा को भारी राहत भी दे दी।

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